अवैध आटो मामला: कोर्ट की नाराजगी के बाद सरकार ने दी अंडरटेकिंग

अवैध आटो मामला: कोर्ट की नाराजगी के बाद सरकार ने दी अंडरटेकिंग

जबलपुर ।   नियम विरुद्ध तरीके से शहर की सड़कों में धमाचौकड़ी मचा रहे आॅटो के मामले को हाईकोर्ट ने काफी सख्ती से लिया। बिना परमिट व रूट के दौड़ रहे आॅटो के खिलाफ कार्रवाई न होने व पेश की कम्पलायंस रिपोर्ट पर न्यायालय ने नाराजगी जाहिर की। जस्टिस आरएस झा व जस्टिस संजय द्विवेदी की युगलपीठ के समक्ष शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अंडरटेकिंग दी कि मंत्री द्वारा किसी भी प्रकार का राजनीतिक दखल कोर्ट आदेश के पालन में नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही अगली सुनवाई के दौरान आरटीओ व एएसपी यातायात के उपस्थित होने की भी जानकारी न्यायालय के समक्ष दी गई। साथ ही नियम विरुद्ध दौड़ रहे आॅटो पर सख्त कार्रवाई होगी। इसके साथ आॅटो डीलरों का अंतरिम आवेदन वापस लेने की प्रार्थना पर न्यायालय ने खारिज करते हुए मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है।

जान की भी परवाह नहीं

उल्लेखनीय है कि सतना बिल्डिंग निवासी सतीश वर्मा व नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दायर याचिकाओं में शहर की सड़कों पर नियम विरुद्ध तरीके से धमाचौकड़ी मचा रहे आॅटो के संचालन को चुनौती दी गई थी। आरोप है कि ऐसे आॅटो न सिर्फ शहर की यातायात व्यवस्था बिगाड़ रहे हैं, बल्कि इस हद तक सवारियों को बैठाते हैं कि हमेशा उनकी जान का खतरा बना रहता है। ऐसे आॅटो शहर की सड़कों को हाई स्पीड पर चलते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं, जिन्हें सड़क पर चलने वाले लोगों की जान की परवाह ही नहीं होती।

कई बार उठाए ये सवाल

याचिकाओं में आरोप है कि शहर की सड़कों पर धमाचौकड़ी मचाने वाले आॅटो के संचालन को लेकर कई बार सवाल उठे, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। मामले की पिछली सुनवाई के दौरान आवेदक की ओर से कहा गया था कि नियम विरुद्ध तरीके से आॅटो की धमाचौकड़ी का ङ्मीम बदस्तूृर जारी है। इतना ही नहीं नियमानुसार तीन सवारी बैठाने का प्रावधान है, लेकिन 15 सवारी बैठाई जा रहीं है, इसके साथ ही पूर्व आदेश के परिपालन में न तो मीटर लगे हैं और न ही किराया सूची।

बिना पहचान किए परमिट

इतना ही नहीं 10 से 15 सवारी एक आॅटो में बैठाई जा रहीं है। इस संबंध में रोजाना ही अखबारों में खबरें प्रकाशित हो रहीं हैं, हर दूसरे दिन ट्रैफिक जाम की स्थिति निर्मित हो रही है। मामले में आवेदक का कहना है कि आॅटो चालको ने मंत्री से अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की। जिसके बाद वगैर वैध परमिटों की पहचान किए बगैर 45 सौ 57 परमिट जारी करने का निर्णय ले लिया गया। जिसके बाद शासन की ओर से सोमवार को सुनवाई के दौरान उक्त अंडरटेकिंग न्यायालय के समक्ष दी गई।