एल्गिन में आसान नहीं नौनिहालों के दीदार करना, टीन शेड में होता है घंटों इंतजार

एल्गिन में आसान नहीं नौनिहालों के दीदार करना, टीन शेड में होता है घंटों इंतजार

जबलपुर ।    पिछले वर्ष कायाकल्प अवार्ड से पुरस्कृत एल्गिन अस्पताल इस बार भी दौड़ में शामिल है। अस्पताल की चमक-धमक बनी रखने का खामियाजा प्रसूताएं व उनके परिजन भुगत रहे हैं। हाल ये है कि गेट से उन्हें अंदर एंट्री के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता है। प्रवेश न मिलने पर थक हारकर महिलाएं टीन शेड के नीचे बैठकर अंदर जाने के लिए घंटों इंतजार करती हैं। गौरतलब है कि एल्गिन अस्पताल में एंट्री का समय निर्धारित है। इस निर्धारित समय के पहले और बाद में पूरी तरह प्रवेश निषेध हो जाता है। ऐसे में मरीजों के हाल जानने या नौनिहाल के दीदार करने उन्हें साइकिल स्टैंड के साथ बने खुले प्रतीक्षालय में समय काटना पड़ रहा है।

सिक्योरिटी के अपने नियम

अस्पताल में जाने के लिए सिक्योरिटी गार्डस के अपने नियम हैं। नियत समय में भी सिर्फ एक ही महिला या पुरुष प्रवेश कर सकेंगे। ऐसे में यदि बुजुर्ग महिला जो स्वयं वार्ड तक पहुंचने में असमर्थ है, उसे गेट पर ही रोक दिया जाता है। कभी-कभार दयालुता दिखाते हुए उन्हें प्रवेश तो मिल जाता है लेकिन बड़ी कवायद के बाद। बंद पड़ा रैन बसेरा मरीजों के साथ आए अटेंडरों के रात में रुकने के लिए रैन बसेरा है। प्रबंधन द्वारा यह कहा गया कि रात में कोई नहीं ठहरता इसलिए इसे बंद कर दिया गया है। सामान्य तौर पर स्थानीयजन तो घर चले जाते हैं लेकिन बाहर से आने वालों को रात में रुकने कोई इंतजाम नहीं है।

...तो फिर प्रवेश मुश्किल

अस्पताल में मरीजों से मिलने का समय सुबह 11 से दोपहर 1 व शाम को 5 से 8 बजे निर्धारित है। ऐसे में यदि किसी प्रसूता के साथ आई महिला दोपहर 1 बजे के बाद अंदर जाना चाहे तो शाम तक इंतजार कराया जाता है। हालांकि भर्ती मरीज के साथ एक अटेंडेंट के लिए पास रहता है। यदि पास लेकर बाहर नहीं निकले तो दोबारा अंदर पहुंचना आसान नहीं है।