जमीनी हकीकत में रोजगार बड़ा मुद्दा 46.80% लोगों ने इसे सही बताया

जमीनी हकीकत में रोजगार बड़ा मुद्दा 46.80% लोगों ने इसे सही बताया

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में भले ही राजनीतिक पार्टियां जतीय समीकरण बैठाकर अपने उम्मीदवार उठा रहे हों, किसानों की बातें हों या पुलवामा हमले के बाद किए गए हवाई हमले की, लेकिन चुनाव में हर बार सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार ही है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ( एडीआर) ने एक राष्ट्रीय सर्वे किया है। चुनाव में वैसे तो एयरस्ट्राइक के बाद राष्ट्रवाद बड़ा मुद्दा बन गया है, लेकिन एडीआर के सर्वे में रोजगार को सबसे बड़ा मुद्दा बताया गया है। सर्वे 31 मुद्दों पर देश की 534 लोकसभा सीटों के 2.73 लाख मतदाताओं पर किया गया है। सर्वे अक्टूबर 2018 से दिसंबर 2018 के बीच कराया गया था। करीब पौने तीन लाख लोगों के बीच किए गए सर्वे में मतदाता से पूछा गया कि आपके लिए सबसे बड़ा मुद्दा कौन सा है। लोगों ने प्राथमिकता के अनुसार इन मुद्दों को चुना।

30.50% वोटर साफ पेयजल को मानते हैं तीसरा बड़ा मुद्दा

30.50% वोटर साफ पेयजल को तीसरा सबसे बड़ा मुद्दा मानते हैं। सबसे बड़ी दिक्कत शहरी इलाकों में देखने को मिल रही है, इसीलिए 35.03% शहरी मतदाताओं ने इसे बड़ा मुद्दा माना है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों के 28.05% मतदाताओं ने ही इस पर सहमति जताई है।

रोजी, सेहत और पानी के लिए महिला और पुरुष की सोच एक

महिला एवं पुरुष मतदाता रोजी, सेहत और पानी के मुद्दे पर लगभग एक बराबर सोचते हैं। इन तीनों प्रमुख मुद्दों पर एक बराबर सोचने वाले महिला एवं पुरुष मतदाताओं की संख्या में ज्यादा अंतर नहीं है। रोजगार के लिए 48.05% पुरुष और 46.61% महिलाएं एक समान सोचती हैं। अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महिलाओं की संख्या पुरुषों के आगे हैं। ये है - 35.29% महिलाएं व 34.29% पुरुष। साफ पानी के लिए भी ऐसी ही हालत है, पानी के लिए 31.69% महिला और 30.91% पुरुष मतदाताओं ने वोट किया।

गांव व शहर में सबसे बड़ी जरूरत नौकरी है

सर्वे में यह स्पष्ट है कि देश के ग्रामीण इलाके हो या शहरी, दोनों ही जगहों पर रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है। सबसे बड़ी मांग है- नौकरी की, सबसे ज्यादा मांग शहरी इलाकों और ओबीसी वर्ग की है। शहरों के 51.60% वोटर और ओबीसी वर्ग के 50.32% वोटरों के बीच सबसे ज्यादा मांग नौकरी है। 23 से 40 उम्र वाले 47.49% मतदाता को रोजगार की जरूरत है।

अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं दूसरी बड़ी मांग

सर्वे में शामिल 534 लोकसभा सीट के मतदाताओं की दूसरी सबसे बड़ी मांग है सही सेहत और अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं। देश के 34.60% मतदाता इसे बेहद जरूरी मानते हैं। शहरी इलाकों के 39.41% लोगों ने इसे बेहद जरूरी माना है।

सैन्य शक्ति से ज्यादा जरूरी मूलभूत सुविधाएं

रिपोर्ट में कहा गया है, मतदाताओं की शीर्ष 10 प्राथमिकता को देखने से साफ है कि भारतीय मतदाता आतंकवाद एवं मजबूत सुरक्षा व सैन्य शक्ति जैसे शासन के मुद्दों की तुलना में रोजगार और स्वास्थ सेवा, पेयजल, बेहतर सड़कों जैसी मूलभूत सुविधाओं को अधिक महत्व देते हैं।

31 प्राथमिकताओं में सरकार का प्रदर्शन

औसत से नीचे एडीआर ने कहा कि यह गंभीर चिंता की बात है कि मतदाताओं की 31 प्राथमिकताओं में से किसी के भी मामले में सरकार का प्रदर्शन औसत या औसत से ऊपर नहीं रहा

सरकार को तय करनी होंगी प्राथमिकताएं

सर्वेक्षण के नतीजे में कहा गया है, इससे स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि मतदाता सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं। सरकार को प्राथमिकताएं तय करनी होंगी और इन क्षेत्रों में अधिक निवेश करना होगा।