दुश्मन होगा नाकाम: अब सीमा की निगरानी के लिए आ रहा है रोबोट

दुश्मन होगा नाकाम: अब सीमा की निगरानी के लिए आ रहा है रोबोट

नई दिल्ली। भारतीय वैज्ञानिक एक ऐसे रोबोट पर काम कर रहे हैं जो हर तरह के इलाके में अंतरराष्ट्रीय सीमा की निगरानी में इस्तेमाल हो सकता है। इस तरह के रोबोट का एक प्रोटोटाइप दिसंबर तक तैयार हो सकता है। डिफेंस क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनी इएछ इस तरह के रोबोट के विकास पर काम कर रही है। कंपनी को इसके विकास के बाद सेना से अच्छे आॅर्डर मिलने की उम्मीद है। बेल के इस रोबोट में ऐसे सेंसर और प्रोग्राम होंगे, जो कंट्रोल सेंटर को तत्काल कोई जानकारी भेज सकेंगे। यह रोबोट श्रीलंका में हाल में हुई आतंकवादी घटनाओं जैसे हालात को रोकने के लिए भी कारगर हो सकता है। सीमा पर गश्ती के लिए ऐसे रोबोट तैनात करने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे सीमा पर हमारे जांबाज सैनिकों की शहादत या उनके घायल होने की घटनाएं कम होंगी। 

70-80 लाख रुपए होगी कीमत

छोटे आॅर्डर के लिए इन रोबोट की अनुमानित लागत 70 से 80 लाख रुपये की होगी। लेकिन ज्यादा संख्या में आॅर्डर मिलने पर इस रोबोट की लागत और कम हो जाएगी। फिलहाल बेल की बेंगलुरु और गाजियाबाद स्थ?ित सेंट्रल रिसर्च लाइब्रेरी और बेंगलुरु के बेल सॉμटवेयर टेक्नोलॉजी सेंटर के 80 वैज्ञानिक और इंजीनियर निगरानी रोबोट तैयार करने में लगे हुए हैं।