नवजात बच्चों को अंधत्व से बचाने हमीदिया में लेजर ट्रीटमेंट शुरू

नवजात बच्चों को अंधत्व से बचाने हमीदिया में लेजर ट्रीटमेंट शुरू

भोपाल हमीदिया अस्पताल में नवजात शिशुओं को अंधत्व से बचाने के लिए रेटिनोपैथी आॅफ प्री-मेच्योरिटी नेत्र जांच और लेजर ट्रीटमेंट शुरू किया गया है। अब तक दो हजार से अधिक शिशुओं का ट्रीटमेंट किया चुका है। गांधी मेडिकल कॉलेज द्वारा अस्पताल में इसके लिए मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक ओपीडी संचालित की जा रही है। हालांकि बाहर से आने वाले बच्चों की रोजाना जांच की जा रही है। विभागाध्यक्ष डॉ. कविता कुमार ने बताया कि रेटिनोपैथी आॅफ प्री-मेच्योरिटी (आरओपी) अक्सर समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों में पायी जाती है। जिन बच्चों का वजन 1500 ग्राम से कम होता है, गर्भावस्था 32 हμते या उससे कम है या बच्चे को जन्म के बाद अधिक मात्रा में आॅक्सीजन की आवश्यकता पड़ी हो, वे इसका शिकार होते हैं। इसमें बच्चों में अंधत्व, भेंगापन, रेटीना डिटेचमेंट, ग्लूकोमा और निकट दृष्टिदोष होता है।

रोजाना 2025 शिशुओं का नेत्र परीक्षण

डॉ. कविता कुमार ने बताया कि कई बार जन्म लेने के कुछ हफ्ते तक नेत्र दोष पकड़ में नहीं आता। इसलिए शिशुओं का नेत्र परीक्षण जन्म के चौथे से छठे हफ्ते के बीच जरूर करवाना चाहिए। रोजाना 20-25 नवजात शिशुओं का नेत्र परीक्षण होता है, जिनमें चार-पांच शिशुओं में उपचार की जरूरत होती है।