पार्क के जरिए हुई भारत-पाक और कश्मीर मुद्दे पर चर्चा

पार्क के जरिए हुई भारत-पाक और कश्मीर मुद्दे पर चर्चा

आईएम भोपाल पार्क नाटक सरल शब्दों में पिरोया गया गंभीर नाटक है, जिसमें संवाद तो सरल है लेकिन मुद्दे सोचने पर विवश करते हैं। किसी स्थान पर अपना स्वामित्व समझना, उस स्थान पर रहने की आदत या उससे खुद का इतिहास जुड़ा मानना और फिर धीरे-धीरे उस स्थान को अपना मान बैठना, जबकि सच यह है कि कोई भी स्थान स्थाई तौर पर किसी का नहीं है। मानव कौल द्वारा लिखित इस नाटक का मंचन सिंधु धौलपुरे ने किया। नाटक की शुरुआत मंच पर हल्की रोशनी में लड़का पार्क में रखी तीन बैंच में से एक पर बैठ जाता है। थोड़ी देर बात एक आदमी आता है और लड़के को बैंच से हटने को कहता है। इसी बीच तीसरा आदमी भी आ जाता है, फिर तीनों बहस करने लगते हैं। नवाज, उदय और मदन नाटक के मुख्य पात्र हैं। नाटक हास्य और व्यंग्य के माध्यम से भारत-पाकिस्तान बंटवारा, कश्मीर के मुद्दे, आरक्षण और शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को बहुत ही सुंदर दृश्यों के माध्यम से निर्देशक द्वारा परिकल्पित किया गया।

डायरेक्टर्स कट

इस नाटक में यह बताया गया कि सरहदें देश को बांट सकती है, लेकिन दिलों को नहीं। वहीं इस नाटक में दिखाया गया है कि शिक्षा देश के लिए जरूरी है बिना शिक्षा के कोई भी देश तरक्की नहीं कर सकता।

सिंधु धौलपुरे