प्रदेश के डायमंड प्रोजेक्ट में अडानी ने दिखाईदिलचस्पी

प्रदेश के डायमंड प्रोजेक्ट में अडानी ने दिखाईदिलचस्पी

भोपाल। कमलनाथ सरकार छतरपुर जिले की बंदर हीरा खदान की नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। इस सरकार ने अब तक न तो कोई रेत खदान की नीलामी की और न किसी ओर की। यह कमलनाथ सरकार की पहली खनिज खदान से जुड़ी नीलामी होगी। करीब 60 हजार करोड़ मूल्य के हीरों के भंडार वाली इस खदान में अडानी समूह की कंपनी वेदांता सिसोर्जेस भी दिलचस्पी दिखा रही है। साथ ही 2017 में इस खदान को छोड़ने वाली चर्चित कंपनी रियो टिंटो भी फिर से इस खदान की नीलामी में शामिल हो सकती है। दो साल पहले तक यह बंदर हीरा खदान रियो टिंटो के पास थी, लेकिन उसने प्रोजेक्ट से अपने कदम वापस खींचते हुए राज्य सरकार को सौंप दिया था। इस कंपनी ने तब खनन क्षेत्र के सर्वेक्षण में 500 करोड़ खर्च किए थे। बंदर डायमंड प्रोजेक्ट 2004 में खोजा गया था। इसके लिए रियो टिंटो ने मध्यप्रदेश सरकार के साथ 2010 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें इस प्रोजेक्ट का विकास और सर्वेक्षण का कार्य शाामिल था। रियो टिंटो 2019 तक इस खनन क्षेत्र में काम शुरू करना चाहती थी। इस बीच दक्षिण अफ्रीका में अपना फोकस करने के कारण उसने इस खदान को छोड़ दिया था। पिछली शिवराज सरकार ने इस प्रोजेक्ट की नीलामी प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें उसे सफलता नहीं मिली।

365 हेक्टेयर की होगी नीलामी

खनिज विभाग की अधिकारी इस खदान की नीलामी प्रक्रिया की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि इस बार हीरा खदान के क्षेत्रफल में कटौती की गई है। सरकार केवल 365 हेक्टेयर क्षेत्र की नीलामी करने जा रही है, जबकि यह खदान 900 हेक्टेयर क्षेत्र में है। सूत्रों का कहना है कि देश के बडेÞ उद्योगपति गौतम अडानी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। लंदन स्थित अरबपति अनिल अग्रवाल और अडानी समूह के स्वामित्व वाली वेदांता रिसोर्सेज जैसी कंपनियों के प्रतिनिधि प्रोजेक्ट की फिजिबिलिटी का पता लगाने के लिए साइट का दौरा कर चुके हैं। कनाडा स्थित फुरा जेम्स के अलावा रियो टिंटो फिर से नीलामी प्रक्रिया में शामिल हो सकती है।