बैगा आदिवासियों के विलुप्त बीज खोजे, तैयार किया बैंक

बैगा आदिवासियों के विलुप्त बीज खोजे, तैयार किया बैंक

जबलपुर। सरकार वर्षाें बाद बैगा आदिवासी की खेती के महत्व को समझ पाई है, इसके चलते गत वर्ष आदिवासियों द्वारा पैदा किए जाने वाले मोटे अनाज को पौष्टिक अनाज का दर्जा दिया गया है और उसके संरक्षण के लिए योजना तैयार की गई है। वहीं आदिवासी बाहुल्य जिला के बैगा चक में बीते कई सालों से कार्य कर रहे ,नरेन्द्र विश्वास ने न केवल इस अनाज के महत्व को समझा और आदिवासियों के विलुप्त हो गए आनाजों के बीज को खोज कर उसका बैंक भी स्थापित करने का काम किया है। उल्लेखनीय है कि सैकड़ों सालों से बैगा एवं आदिवासी वर्षो से जंगलों के खाली मैदान और बंजर भूमियों में आग लगाकर उसमें खेती किया करते रहे है। बिना पानी एवं पथरीली जमीन में मोटे अनाज की उपज लेने की प्राचीन खेती का तरीका उन्हें विरासत में मिला था लेकिन फारेस्ट विभाग की ज्यादतियों के चलते वर्षो बैग चक में खेती बंद रही ,नतीजन उनके अनाज विलुप्त हो गए थे। जब आदिवासियों को उनकी जंगल-जमीन का हक मिला तो उनके पास बंजर पथरीली और भूमि में खेती करने वाले बीज उनके पास मौजूद नहीं थे।

पूरे भारत में की खोज

आदिवासियों को मिश्रित खेती के लिए उनके द्वारा उपयोग किए गए अनाज की बीज की खोजबीन समाज सेवी नरेन्द्र विश्वास ने की। उनके द्वारा आदिवासियों द्वारा की जाने वाली खेती के बीच घूम घूम एकत्र किए। इस कार्य में श्री विश्वास को करीब 7 साल लग गए। आदिवासियों के बीच असम, छोटा नागपुर, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश सहित अन्य क्षेत्र में बसे आदिवासियों से एकत्र किए गए। कोदो, कुटकी, सावा, रांगी, ज्वार, बाजरा, मक्का, खीरा, सेम, बरबटी, राहर, उड़द सहित अन्य दर्जनों प्रकार की किस्में एकत्र की गई है जो सामान्य बीज से हटकर आदिवासियों के प्राचीन मिश्रित खेती में उपयोग होने वाले बीज है।

ऐसे काम करता है बीज बैंक

पिछले दिनों श्री विश्वास ने डिंडौरी जिले के ग्राम साकर में बीच बैंक की प्रदर्शनी लगाई। यहां किसानों को बीज वितरण कर उनके बदले अनाज लिए गए। इसी तरह उन्होंने गांव गांव में बीज बैंक बना रखा है जिसमें बीज का अदान प्रदान एवं संरक्षण किया जाता है।

ये इलाके हैं मोटे अनाज के

मध्य प्रदेश में ये फसलें मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, सीधी, सिंगरौली, रीवा, सतना, कटनी,सिवनी एवं जबलपुर, कटनी आदि में बहुतायत से आदिवासी मोटा अनाज पैदा करते है।