बदलाव की ‘भेंट’ चढे राजधानी के तीन महत्वपूर्ण थानों के टीआई

बदलाव की ‘भेंट’ चढे राजधानी के तीन महत्वपूर्ण थानों के टीआई

भोपाल सरकार बनने के बाद कांग्रेस पार्टी का स्लोगन ‘वक्त है बदलाव’ का अब ‘वक्त है बदले का’ में तब्दील होता नजर आ रहा है। इसकी चपेट में नए शहर के तीन थाना प्रभारी आ चुके हैं। अनिल वाजपेयी, मदनमोहन मालवीय समेत तीन थाना प्रभारी वक्त के इस बदलाव की भेंट चढ़ चुके हैं। हाल ही में इन थाना प्रभारियों को हटा दिया गया है। सूत्रों की मानें तो जहांगीराबाद थाने से हटाए गए टीआई अनिल वाजपेयी ने विस चुनाव के दौरान कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता, जो मध्य से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे, उन्हें एक मतदान केंद्र में नहीं घुसने दिया था। इस नेता की नाराजगी ने उन्हें थाने से रुख्सत करवा दिया।

मछली बिकवाना महंगा पड़ा

कमला नगर थाने से हटाकर क्राइम ब्रांच भेजे गए टीआई मदन मोहन मालवीय को कलियासोत डेम के कब्जे को लेकर भाजपा और कांग्रेस पार्टी के नेताओं के बीच चल रहा विवाद भारी पड़ गया। विवाद के बाद डेम से निकाली जा रही मछली को कमला नगर पुलिस ने जब्त करवा दिया था। एक दिन तक मछली थाने में रखी रही। ठेकेदार ने मछली खराब होने का हवाला दिया था। इस पर टीआई ने एक आरक्षक के साथ मछली की खेप बाजार में भिजवा दी। बाजार में उक्त मछली 41 हजार रुपए में बिकी। इसकी खबर कांग्रेस नेताओं को हो गई। इसके बाद एक मंत्री की शिकायत पर उन्हें थाने से रुख्सत कर दिया गया।

मंत्री की नाराजगी के चलते विदाई: टीटी नगर के तत्कालीन टीआई आलोक श्रीवास्तव एक पासपोर्ट वेरीफिकेशन में मातहत पुलिसकर्मियों की लापरवाही के चलते एक मंत्री के टारगेट बन गए। हालांकि बाद में वरिष्ठ अफसरों ने उन्हें दूसरे थाने की कमान सौंप दी।

पूर्व मंत्री से विवाद का मिला प्रतिसाद

भाजपा सरकार में मंत्री रहे उमाशंकर गुप्ता द्वारा हटाए गए तत्कालीन टीआई उमेश तिवारी को लंबा वनवास काटना पड़ा। करीब पांच साल लोकायुक्त में गुजारकर बमुश्किल बीते साल सीएसपी एमपी नगर के रूप में उनकी वापसी हुई थी। भाजपा सरकार में हटाए गए सीएसपी उमेश तिवारी को वापस टीटी नगर संभाग की कमान सौंपकर उन्हें कांग्रेस सरकार ने उपकृत कर दिया है।

सीएसपी बिट्टू शर्मा को लूप लाइन में भेजा

हाइवे कीलर आदेश खाम्बरा और उसकी गैंग को गिरफ्तार कर 34 हत्याओं का खुलासा कर प्रदेश को सुर्खियों में लाने वाली अवधपुरी सीएसपी बिट्टू शर्मा को महज 8 माह में हटा दिया गया। बेदाग छवि वाली सीएसपी बिट्टू शर्मा को किसी राजनेता से कोई विवाद नहीं था और न ही कोई शिकायत। बताया जाता है कि मुख्यालय ने राजधानी में किसी चहेते अफसर के लिए जगह बनाने उन्हें लूपलाइन में भेज दिया।