भगवान सुव्रतनाथ की हुई प्राण प्रतिष्ठा

भगवान सुव्रतनाथ की हुई प्राण प्रतिष्ठा

जबलपुर।   पंचकल्याण प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव स्थल पर शनिवार को सुबह के ठीक 7.35 बजे कैलाश पर्वत पर भगवान आदिनाथ मोक्षकल्याणक हुआ। इसके साथ ही हजारों भक्तों ने मंत्रोच्चार के बीच महायज्ञ में आहुतियां दीं। दोपहर में गजरथ फेरी लगाई गर्इं। महोत्सव में सुबह से हजारों भक्तों की भीड़ शुरू हो गई थी। हर कोई इस महाआयोजन का हिस्सा बनते हुए अपना कल्याण करना चाहता है। इसके लिए देशभर से भक्तों का भी शहर आगमन हुआ है।

शहर में 10 साल बाद आयोजन

महोत्सव में दोपहर 1.30 बजे ऐरावत स्वरुप, मंगल के प्रतीक गजरथ पर सौधर्म इंद्र भगवान की मूर्ति के साथ विराजमान होकर सात परिक्रमा की। वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों के बीच सकल दिगंबर जैन समाज के लाखों लोग गजरथ फेरी में शामिल हुए। गजरथ फेरी के लिए देर रात तक रथों को सजाया गया था, जिसे देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। इसके पूर्व कल मुनि योग सागर महाराज के सानिध्य में मंत्र विधि, भक्ति विधि, प्राण प्रतिष्ठा और सूर्य मंत्र की विधि संपन्न की गई थी। गजरथ महोत्सव के अंतिम दिन आयोजन स्थल पर रात तक विविध आयोजनों की श्रृंखला का क्रम जारी रहा।

स्वर्ग सा नजारा दिखा

साढ़े 6 एकड़ के विशाल दायरे में 1 हजार इन्द्र-इन्द्राणी धरती पर स्वर्ग का नजारा पेश कर रहे थे। 30 हजार वर्गफीट के विशाल पंडाÞल और 6 हजार वर्गफीट की वेदी में पंच कल्याण के विधान पूर्ण किए गए। जैन तीर्थ स्थल पिसनहारी की मढ़िया के सामने स्थित वर्णी गुरुकुल से लेकर मेडिकल कॉलेज के पीछे गजरथ नगर बसाया गया।

दुनिया भर से आए भक्त

गजरथ महोत्सव में दुनिया भर से एक लाख जैन धर्मावलंबी शामिल हुए। समिति के अध्यक्ष अशोक जैन ने बताया कि आचार्य विद्यासागर महाराज के गृहस्थ जीवन के सगे छोटे भाई और उनके शिष्य ज्येष्ठ श्रेष्ठ मुनि योग सागर महाराज ने ससंघ गजरथ को गरिमा प्रदान की। शिष्य संघ में संभव सागर, पूज्य सागर, शैल सागर, अतुल सागर, नि:सीम सागर, शाश्वत सागर व प्रबुद्ध सागर शामिल हुए।

सागर रहली से आया रथ

श्री वर्णी गुरुकुल परिसर में 5 करोउÞ की लागत से 5 वर्ष में तैयार हुए दिगम्बर जैन मंदिर में 6 माह की शिल्प कला साधना से सृजित प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा हुई। इसके लिए श्री मज्जिनेन्द्र जिनबिम्ब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव का आयोजन किया गया। आयोजन में यूपी के खामिरपुर से गज और रहली सागर से रथ आए। बाहर से आए 2 जीवंत गंजा के अलपा कृत्रिम तरीके से तैयार इन्द्र वाहन ऐरावत भी 21 फीट ऊंचे रथों पर जोते गए। समापन दिवस पर पंच कल्याण स्थल के तीन खंडों की सात फेरियां लगाई गर्इं।

जैन समाज ने मनाया अवकाश

गजरथ महोत्सव के समापन पर जैन समाज ने अवकाश मनाया। प्रमुख व्यापारिक स्थल लार्डगंज, बड़ा फुहारा, नरघैया, गढ़ा बाजार समेत सभी स्थलों में जैन समाज ने अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखे।