मेडिकल में रैम्प रिनोवेशन की धीमी रफ़्तार बनी मुसीबत

मेडिकल में रैम्प रिनोवेशन की धीमी रफ़्तार बनी मुसीबत

जबलपुर  नेताजी सुभाष चंद्र बोस में रेनोवेशन के नाम पर मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। हाल ही में 4 वार्डों के रिनोवेशन के बाद पिछले एक माह से रैम्प में टाइल्स लगाने का काम शुरू किया गया है। लोगों का कहना है कि 60 साल से अधिक पुराने भवन में इस तरह के पत्थर लगाकर वजन बढ़ाया जा रहा है। इससे बिल्डिंग को भी खतरा हो सकता है। गौरतलब है कि ऊपर विभिन्न वार्डों में जाने के लिए लोग रैम्प का सहारा लेते हैं लेकिन रैम्प निर्माण धीमी गति से होने के कारण मुख्य द्वार का रैम्प पूरी तरह बंद कर दिया गया है। ऐसे में लोगों को घूमकर पिछले रैम्प से जाना पड़ रहा है। ऐसे में हर संभव बेहतर सुविधाएं देने की प्रबंधन की पोल खुल रही है।

26 लाख का बजट स्वीकृत

बताया जाता है कि करीब 2 माह पूर्व शासन ने मेडिकल कॉलेज में रंग-रोगन, रैम्प, खिड़कियां व टॉयलेट के दरवाजे की मरम्मत के लिए 26 लाख रुपए का बजट दिया था। फिलहाल रंग-रोगन का काम तो हो चुका है लेकिन रैम्प अधूरा ही बन पाया है और काम धीमी गति से हो रहा है। वहीं पुराने रैम्प में बड़े-बड़े गड्ढे होने से मरीजों को ले जाते समय उसमें स्ट्रेचर फंस जाते हैं।

परिजन ले जा रहे स्ट्रेचर

इस स्थिति में ऊपर के वार्डों में मरीज ले जाने या जांच के लिए नीचे लाने में वार्ड ब्वॉय सीधे हाथ खींच लेते हैं। बिना परिजनों की मदद के वे मरीजों को स्ट्रेचर में ले जाने से साफ इनकार कर देते हैं। किसी तरह मरीज को लिटाकर हिचकोले खाते रैम्प से वार्ड तक पहुंचाया जा रहा है। इस खस्ताहाल रैम्प में मरीजों की परेशानियां ज्यादा बढ़ गई हैं।

सभी जांचें ग्राउंड फ्लोर पर

मेडिकल में जहां मरीजों को ऊपर वार्ड में भर्ती किया जाता है और सभी जांचें नीचे ग्राउंड फ्लोर में होती है। मरीजों को प्रतिदिन एक्सरे, सोनोग्राफी, पैथोलॉजी जांच के लिए नीचे लाना पड़ता है। टूटे और जर्जर रैम्प से उनका दर्द और बढ़ जाता है लेकिन प्रबंधन इस ओर गंभीर नहीं है।

अधिकांश लिफ्ट बंद

मेडिकल में पूर्व में चार पुरानी लिफ्ट थीं। बूढ़ी हो चुकी इन लिफ्ट के आए दिन बंद होने या बीच में ही फंस जाने के मामले सामने आने लगे थे। प्रबंधन ने दो नई लिफ्ट लगवार्इं जिसमें से एक लिफ्ट सिर्फ डॉक्टरों व नर्सेस के लिए और दूसरी लिफ्ट में हमेशा मरीजों की कतार लगी रहती है। ऊपर गई लिफ्ट को नीचे आने में घंटों लग जाते हैं। ऐसे में मरीजों को रैम्प से ही लाना और ले जाना परिजनों की मजबूरी है। वर्तमान में पुरानी दो लिफ्ट पूरी तरह बंद हैं।

कभी रिपेयर नहीं हुए

चिकित्सकों की मानें तो मेडिकल में बनाए गए दोनों रैम्प बनने के बाद कभी रिपेयर ही नहीं किए गए। अब ये रैम्प पूरी तरह घिस गए हैं और पैदल चलने में गिरने का डर बना रहता है। इसी तरह दूसरो रैम्प में गड्ढे होने के बाद भी इनकी मरम्मत नहीं कराई।