लक्ष्य से पिछड़ा टीबी मुक्त अभियान, एक तिहाई ही मिले पॉजिटिव मरीज

लक्ष्य से पिछड़ा टीबी मुक्त अभियान, एक तिहाई ही मिले पॉजिटिव मरीज

जबलपुर। सरकार ने वर्ष 2015 तक देश को टीबी (टॅयूबरक्लोसिस) मुक्त बनाने की मुहिम शुरू की है। लेकिन मरीजों के लगातार सामने आने और करीब आधे मरीजों के उजागर न होने से इस अभियान को झटका लग सकता है। गौरतलब है कि दिए गए टारगेट के आधे टीबी पीड़ित ही मिल सके। इसमें बड़ी परेशानी प्राइवेट डॉक्टर और ड्रगिस्ट की ओर से टीबी मरीजों का ब्यौरा सरकार से साझा नहीं कर रहे हैं। वहीं कई मरीज इस मर्ज को छिपाने मे लगे रहते हैं। नहीं हो रही कार्रवाई सरकार ने निजी अस्पतालों, क्लीनिक, पैथोलॉजी, एक्सरे, दवा दुकानदारों को टीबी पीड़ितों की सूचना देना अनिवार्य किया है लेकिन सही जानकारी नहीं मिल पाती है। इस मर्ज को छिपाने वालों पर भादवि की धारा 269 और 270 के तहत कार्रवाई का प्रावधान और 6 माह की सजा तक हो सकती है। नि:शुल्क उपचार की सुविधा सरकारी अस्पताल विक्टोरिया और मेडिकल में टीबी के उपचार की नि:शुल्क सुविधा है। लेकिन निजी पैथोलॉजी में जांच और लाभ के चक्कर में इन मरीजों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती है। 63 बच्चे टीबी मुक्त पिछले वर्ष राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के निर्देश पर सभी विश्व विद्यालयों में 99 टीबी पीड़ितों को गोद लिया गया था। इनमें से साल भर में 63 बच्चे टीबी मुक्त हो गए है। बाकी के स्वास्थ्य में सुधार बताया गया है। अब प्रशासन समाज सेवी संस्थाओं को जोड़कर अभियान को सशक्त बनाएगी।

पशु वैज्ञानिक लेंगे नए पीड़ितों को गोद

प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के अभियान में वेटरनरी विवि ने नई पहल की है। विभाग के वैज्ञानिक अब टीबी पीड़ित बच्चों को गोद लेंगे। इस संबंध में विवि की नोडल अधिकारी डॉ. मधु स्वामी ने बताया कि कुलपति डॉ. प्रयाग दत्त जुयाल के मार्गदर्शन में नए टीबी पीड़ित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें गोद लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत पहले 5 टीबी पीड़ितों को गोद लिया था, जिसमें 3 टीबी मुक्त होकर स्वस्थ्य हो चुके हैं। वर्तमान में केंट अस्पताल में रजिस्टर्ड 10 पीड़ितों को गोद लेकर उनकी जिम्मेदारी विवि प्रशासन और पशु चिकित्सक उठा रहे हैं।

नि:शुल्क उपचार की सुविधा

सरकारी अस्पताल विक्टोरिया और मेडिकल में टीबी के उपचार की नि:शुल्क सुविधा है। लेकिन निजी पैथोलॉजी में जांच और लाभ के चक्कर में इन मरीजों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती है।