स्कूल में होगी मशरूम की खेती, जरूरतमंद बच्चों को मिलेगी मदद

स्कूल में होगी मशरूम की खेती, जरूरतमंद बच्चों को मिलेगी मदद

जबलपुर/डिण्डौरी। समीपवर्ती आदिवासी जिला डिण्डौरी के शिक्षक महेन्द्र सिंह ठाकुर ने सरकारी स्कूल में मशरूम की खेती करने का बीड़ा उठाया है। शिक्षक का जज्बा और मकसद यह है कि वह गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले बच्चों के लिए न सिर्फ मददगार बने बल्कि इस पहल से होने वाली आय में उन्हें भागीदार बनाए। मात्र पांच हजार की लागत से शिक्षक ने करीब एक लाख रूपये की मशरूम पहली किश्त में पैदा करके भी तैयार कर ली है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक रयपुरा में इस अनूठी पहल की शुरुआत करीब डेढ़ माह पहले हुई। शाला के प्राचार्य आलोक जैन की अनुमति के बाद शिक्षक श्री ठाकुर ने दो अतिथि शिक्षकों प्रमोद गवले तथा दीपक ठाकुर के साथ करीब दो दर्जन छात्रों का भी सहयोग लिया और 40 बैग मशरूम का एक माह में उत्पादन कर दिखाया।

अभावग्रस्त जीवन देखा

शिक्षक श्री ठाकुर ने आदिवासी बाहुल्य जिले में 95 फीसदी ऐसे बच्चों को देखा है, जो आज भी पैरों में चप्पल नहीं पहन पा रहे हैं। फीस चुकाना या शिक्षण व अन्य जरूरी कार्यों की पूर्ति इनके लिए बेहद दुश्वारी भरा होता है। श्री ठाकुर चाहते हैं कि नाम मात्र की पूंजी से वे इतनी आय अर्जित कर लें, जिससे जरूरतमंद बच्चों को अभावग्रस्त जीवन से उभारा जा सके।

ऐसी होगी रणनीति

शिक्षकों की टीम ने तय किया है कि मशरूम उत्पादन के आय-व्यय का तमाम लेखा-जोखा एक समिति के पास होगा। यह समिति अभावग्रस्त बच्चों की सूची भी रखेगी और उनकी जरूरतों को पूरा करने का काम करेगी।

यह भी है योजना

शिक्षक चाहते हैं कि वे न सिर्फ मशरूम बल्कि कृषि क्षेत्र से जुड़े छात्रों के लिए तरह-तरह की तकनीकों और विकसित बीजों की भी जानकारी उपलब्ध कराएं ताकि कृषि कार्य में भी बच्चे लाभ अर्जित कर सके।

एक कमरे का उपयोग

बताया जाता है कि शाला के 12बाय60 के एक कमरे में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई। 21 दिनों तक मशरूम को अंकुरित किया गया और उसके सात दिन बाद मशरूम के 40 बैग तैयार हो गये। एक बैग में करीब पांच किलो मशरूम के हिसाब से चालीस बैगों में दो क्विंटल मशरूम की पैदावार हुई है, बाजार मूल्य के मुताबिक यह मशरूम 1लाख 20 हजार की होती है।