सीजीएसटी : फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों का चूना लगा रहे कारोबारी

सीजीएसटी : फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों का चूना लगा रहे कारोबारी

भोपाल  प्रदेश के कई कारोबारी फर्जी कंपनियों और उसके बिलों के आधार पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की चोरी कर रहे हैं। जीएसटी से जुड़ी केंद्र सरकार की एजेंसी कस्टम-सेंट्रल एक्साइज एवं जीएसटी विभाग (सीजीएसटी) ने पिछले एक महीने के दौरान विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई करते हुए 15 करोड़ से अधिक के मामले पकड़े हैं। विस्तृत जांच पड़ताल के बाद यह राशि और ज्यादा बढ़ सकती है। यह कार्रवाई जबलपुर, इंदौर, छतरपुर, सिवनी सहित अन्य शहरों में की गई थी। ये कारोबारी फर्जी बिलों के आधार पर करोड़ों रुपए का इनपुट के्रडिट टैक्स बचा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, विभाग को शिकायत मिली थी कि कई कारोबारी फर्जी कंपनियों से फर्जी बिल बनवाकर सीजीएसटी में छूट ले रहे हैं। इसमें व्यापारी फर्जी कंपनियों से माल का बिल बनवा लेते हैं। फिर रिटर्न में इन बिलों को जिक्र कर इनपुट के्रडिट में छूट हासिल कर लेते हैं। जबकि वास्तव में कारोबारी यह माल कागजों पर लेते हैं। इस तरह कई फर्जी कंपनियां भी खड़ी हो गई, जो फर्जी बिल बनाने का काम कर रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, सीजीएसटी ने एक महीने के दौरान जबलपुर, इंदौर, सिवनी एवं भोपाल सहित कई शहरों में ऐसे कई मामले उजागर कर गिरμतारियां भी की है। इन कारोबारियों से दस्तावेज जब्त कर उनकी विस्तृत जांच पड़ताल भी शुरू कर दी है। कस्टम-सेंट्रल एक्साइज एवं जीएसटी विभाग (सीजीएसटी) के मुख्य आयकर आयुक्त विनोद कुमार सक्सेना के मुताबिक, फर्जी इनवाइस के जरिए इनपुट टैक्स के्रडिट लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

ये मामले सामने आए

* डीजीजीआई ने इसमें क्रेडिट हस्तांतरण करने के आरोप में सिवनी के नितिन नीखरा को गिरμतार किया गया था। उसने सरकारी खजाने को साढ़े पांच करोड़ रुपए का चूना लगाया है। नीखरा की कंपनी गनिशका सीएंडएफ की जांच भी की गई थी।

* इसी तरह डीजीजीआई के अधिकारियों ने भी फर्जी बिल के आधार पर साढ़े चार करोड़ रुपए की क्रेडिट बांटने के मामले में एक व्यापारी को गिरμतार किया था। सिवनी के आयरन एंड स्टील के कारोबारी अंकित तिवारी ने फर्जी बिलों के आधार पर 4.5 करोड़ रुपए का चपत लगाई।

* इसी तरह इंदौर के एक मामले में मुंबई निवासी जगदीश कानानी को गिरμतार किया। जगदीश फर्जी फर्में खड़ी कर रहा था, जिनके जरिए फर्जी टैक्स क्रेडिट हासिल कर जीएसटी घोटाले का ताना-बाना बुना जाता था।