सेना के लिए नई चिंता... 2018 में 8 पोस्ट ग्रेजुएट, 19 ग्रेजुएट बने आतंकी

सेना के लिए नई चिंता... 2018 में 8 पोस्ट ग्रेजुएट, 19 ग्रेजुएट बने आतंकी

नई दिल्ली। भारतीय सेना के लिए पढ़े-लिखे नौजवानों का आतंक के रास्ते पर जाना नई चुनौती बन गया है। कश्मीर में सेना इस नई चुनौती का सामना कर रही है। पिछले साल कश्मीर में जिन युवाओं ने आतंक की राह पकड़ी उसमें 8 पोस्ट ग्रेजुएट हैं और 19 ग्रेजुएट। 2017 के मुकाबले पढ़े लिखे आतंकियों की भर्ती में इजाफा हुआ है जो आर्मी के लिए भी एक चुनौती बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि जब एक आतंकवादी मरता है तो वह अपने पीछे नए आतंकवादियों की भर्ती का रास्ता खोल देता है। लेकिन जब एक पढ़ा लिखा आतंकवादी मरता है तो ज्यादा

0 से 8 और 1 से हुए 19 इंडियन आर्मी

सूत्रों के मुताबिक 2017 में कुल 128 युवाओं ने आतंक की राह पकड़ी। जिसमें कोई पोस्टग्रेजुएट नहीं था, 1 ग्रेजुएट था, 4 बारहवीं पास और 4 दसवीं पास थे। लेकिन 2018 में पढ़े लिखे आतंकियों की संख्या बढ़ गई। 2018 में कुल 209 युवा आतंकियों के साथ गए। इस बार पढ़े लिखे लोग भी आतंकियों से प्रभावित दिखे। इसमें 8 पोस्ट ग्रेजुएट, 19 ग्रेजुएट, 15 बारहवीं पास और 9 दसवीं पास थे।

क्यों जा रहे पढ़े लिखे लोग : वर्चुअल वर्ल्ड में बौद्धिक हिंसा फैलाने वाले को अब ज्यादा ग्लैमराइज किया जा रहा है। दुनिया भर में इसकी चर्चा हो रही है। हर मरा आतंकी नए आतंकी को जन्म दे रहा है और पढ़ा लिखा आतंकी ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है, क्योंकि वह कट्टरता को फैलाने में ज्यादा अहम हथियार साबित हो रहा है।