प्रदेश की 4,264 कॉलोनियां फिर हुर्इं अवैध; हाईकोर्ट ने पूर्ववर्ती शिवराज सरकार का फैसला पलटकर खत्म की धारा 15- A

प्रदेश की 4,264 कॉलोनियां फिर हुर्इं अवैध; हाईकोर्ट ने पूर्ववर्ती शिवराज सरकार का फैसला पलटकर खत्म की धारा 15- A

ग्वालियर हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने शिवराज सरकार द्वारा लाए गए निगम कॉलोनाइजर रजिस्ट्रीकरण नियम 1998 की धारा 15 ए खत्म कर दी है। इस फैसले से 4,264 कॉलोनियां अवैध हो गई हैं। कोर्ट ने यह आदेश उमेश बोहरे की याचिका पर दिया है। इसमें कहा गया था कि शिवराज सरकार ने धारा-15 ए का दुरुपयोग कर अवैध कॉलोनाइजरों को फायदा पहुंचाया। पूर्ववर्ती सरकार ने धारा 15 ए लाकर कॉलोनियों को वैध किया था।

याचिकाकर्ता ने कहा- वोट बैंक बढ़ाने की कोशिश थी

याचिकाकर्ता उमेश बोहरे ने हाईकोर्ट में कहा था कि प्रदेश की शिवराज सरकार ने 2018 में अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए कई योजनाओं का नियमों के विपरीत लाभ लेने के कोशिश की। इसके तहत प्रदेश में बस चुकी अवैध कॉलोनियों को धारा 15 ए के तहत वैध किया जा रहा है, जो नियम विरुद्ध है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में ऐसे सरकारी सर्वे नंबर पेश किए, जिन्हें नियम विरुद्ध वैध कॉलोनियों में शामिल किया गया।

कोर्ट ने कहा- जिम्मेदार अफसरों पर भी कार्रवाई करें

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश की वह सारी बस्तियां फिर से अवैध हो गई हैं, जिन्हें शिवराज सरकार ने धारा 15- ए के तहत वैध कर दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अवैध कॉलोनियां को बसाने के दौरान जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ भी निगम की धारा 292ए के तहत कार्रवाई की जाए। उस सर्किल के डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, आरआई और अवैध कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई हो। हालांकि अफसरों का कहना है कि महज 200 कॉलोनियां ही वैध हो सकी थीं।

ग्वालियर से ही हुई थी शुरुआत

8 मई 2018 को प्रदेश भर की अवैध कॉलोनियों को वैध करने की घोषणा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी। इसकी शुरुआत ग्वालियर से की गई थी। इसके तहत ग्वालियर नगर निगम सीमा की 690 अवैध कॉलोनियों में पहले चरण में 63 अवैध कॉलोनियों को वैध करने की घोषणा की गई थी। इसके साथ ही प्रदेश की 4,264कॉलोनियों को वैध करने का ऐलान किया था। लेकिन अब यह फिर से अवैध हो गई हैं।