ताजमहल के ऐतिहासिक दाखिल दरवाजे का एक हिस्सा ढहा, नीचे रखीं गुमठियां क्षतिग्रस्त

ताजमहल के ऐतिहासिक दाखिल दरवाजे का एक हिस्सा ढहा, नीचे रखीं गुमठियां क्षतिग्रस्त

भोपाल। राजधानी की ऐतिहासिक विरासतों में शामिल नवाबी दौर में बने गेट मेंटेनेंस न होने से जर्जर हो चुके गेट अब दम तोड़ने लगे हैं। रविवार को शाजहांनाबाद स्थित दाखिल दरवाजे का एक बड़ा हिस्सा भरभरा के ढह गया। करीब 40 फ्रीट ऊंचाई से मलबा नीचे गिरा जिससे यहां रखी गुमठियां चकनाचूर हो गईं। हालांकि गनीमत ये रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। इधर, खबर लगते ही नगर निगम अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंच गई। एहतियात के तौर पर गेट के नीचे से ट्रैफिक बंद करा ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया। बता दें कि ऐतिहासिक गेटों के टूटने का का सिलसिला नया नहीं है। हर साल बारिश में किसी न किसी गेट का कुछ न कुछ हिस्सा टूटकर गिरता रहता है। पिछले साल अगस्त में ही बाग फरहतअफ्जा के 150 साल पुराने गेट का छज्जा गिरा था। जिसके बाद निगम ने इसे जर्जर मामते हुए रातोंरात जमींदोज कर दिया था। हेरीटेज साइट होने की वजह से काफी बवाल भी मचा था। इसी कड़ी में रविवार को शाहजहांनाबाद स्थित नवाबी दौर के दाखिल दरवाजे का एक बड़ा हिस्सा टूट कर गिर गया। इससे जहां इन ऐतिहासिक दरवाजों के मेंटेनेंस को लेकर एक बार फिर सवाल खड़ा हुआ है, वहीं डर ये भी है कि कहीं निगम इसे जर्जर मानते हुए रातोंरात ढहा न दे।

अफसरों ने ठान लिया था ढहाना है गेट

9 अगस्त 2018 को बागफरहत अफ्जा स्थित 150 साल पुराने ऐतिहासिक गेट का छज्जा गिर गया था। निगम अफसरों ने गेट का जायजा लिया और 11 अगस्त को जेसीबी से गेट ढहा दिया गया। अहम बात यह थी कि ये कार्रवाई जोनल अधिकारी और उपायुक्त ने मौखिक कर्चा के तहत कर ली। निगम आयुक्त को इसकी भनक तक नहीं लगी थी। गेट टूटने के बाद बवाल हुआ तो तत्कालीन उपायुक्त बीडी भूमरकर और जोनल अधिकारी कमर साकिब को सस्पेंड कर दिया गया था। हालांकि कुछ दिनों बाद ही दोनों बहाल भी हो गए थे।