फ्रांस में इमाम और मुस्लिम शिक्षकों के प्रवेश पर लगी रोक

फ्रांस में इमाम और मुस्लिम शिक्षकों के प्रवेश पर लगी रोक

पेरिस फ्रांस सरकार ने विदेशी इमाम और मुस्लिम शिक्षकों के देश में आने पर रोक लगा दी है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यह फैसला कट्टरपंथ और अलगाववाद रोकने के लिए लिया है। साथ ही स्पष्ट किया कि फ्रांस में मौजूद सभी इमामों को फ्रेंच सीखना अनिवार्य होगा। उन्होंने आगाह किया कि फ्रांस में रहने वालों को कानून का सख्ती से पालन करना होगा। फ्रांस के मुस्लिम बाहुल्य मुलहाउस शहर में दौरा करने के मौके पर मैक्रों ने कहा, हम विदेशी इमामों और मुस्लिम शिक्षकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। इनकी वजह से देश में कट्टरपंथ और अलगाववाद का खतरा बढ़ा है।

43 साल पुराना समझौता 2020 में किया खत्म

पिछले साल फ्रांस की कुल जनसंख्या करीब 6.7 करोड़ थी। इसमें करीब 65 लाख मुस्लिम हैं। फ्रांस का वर्ष 1977 में चार देशों से एक समझौता किया था, जिसके तहत अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, मोरक्को और तुर्की फ्रांस में इमाम, मुस्लिम शिक्षक भेज सकते हैं। समझौते में यह भी शर्त थी कि फ्रांस में अधिकारी इन इमामों या शिक्षकों के काम की निगरानी नहीं करेंगे। हर साल 300 इमाम करीब 80 हजार छात्रों को शिक्षा देने फ्रांस आते थे। वर्ष 2020 के बाद समझौता खत्म हो जाएगा। सरकार ने फ्रेंच मुस्लिम काउंसिल को आदेश दिया है कि वह इमामों को स्थानीय भाषा सिखाए और किसी पर इस्लामिक विचार न थोपे जाएं।