बड़ा प्रश्न- लोधी विधायक रहेंगे या सदस्यता रद्द मानी जाएगी

बड़ा प्रश्न- लोधी विधायक रहेंगे या सदस्यता रद्द मानी जाएगी

भोपाल। पन्ना जिले के पवई से विधायक रहे प्रहलाद लोधी को भोपाल विशेष न्यायालय द्वारा सुनाई गई दो साल की सजा पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। रोक 7 जनवरी तक रहेगी। कोर्ट के इस फैसले पर लोधी ने कहा कि मुझे उच्च न्यायालय पर पूरा भरोसा था। विधानसभा अध्यक्ष ने मामले में विधि परामर्श लेने की बात कही है। लोधी ने विशेष कोर्ट से मिली दो साल की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। मामले पर बहस के दौरान के हाईकोर्ट में लोधी की ओर से नवजोत सिंह सिद्धू के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया। जस्टिस वीपीएस चौहान की सिंगल बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित कर बाद में सुनाने की व्यवस्था दी थी। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई। भाजपा ने इसे सच्चाई की जीत बताया, तो कांग्रेस ने कानून का हवाला दिया। इस मामले में बड़ा प्रश्न खड़ा हो गया है कि लोधी विधायक रहेंगे या उनकी सदस्यता रद्द मानी जाएगी। विधानसभा सचिवालय का तर्क है कि हाईकोर्ट ने सजा पर अंतरिम रोक लगाई है। उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आधारित सदस्यता रद्द करने की कार्रवाई हुई है।

क्यों की गई थी सदस्यता समाप्त

एक तहसीलदार से मारपीट के मामले में भोपाल की विशेष अदालत ने विधायक प्रहलाद लोधी को 2 साल की सजा सुनाई थी। इसके आधार पर विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यता समाप्त कर दी थी। लोधी ने भोपाल की विशेष अदालत के फैसले को अपील के जरिए हाईकोर्ट में चुनौती दी। साथ ही अंतरिम आवेदन के जरिए सजा पर रोक की मांग की। बुधवार को आवेदन पर बहस पूरी होने के बाद सुरक्षित रखा आदेश गुरुवार को जारी किया गया। मामले में भाजपा विधायकों ने पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के नेतृत्व में राज्यपाल से मुलाकात करते हुए सदस्यता रद्द करने का विरोध किया था।

तानाशाहीपूर्ण रद्द की सदस्यता

विशेष अदालत ने मुझे दो साल की सजा सुनाई थी, लेकिन अदालत ने 12 दिसंबर तक के लिए जमानत भी दे दी थी। अगर जमानत नहीं होती और जेल चला जाता तब विधानसभा सदस्यता रद्द करनी थी। मेरे हाईकोर्ट जाने से पहले ही कार्रवाई कर दी गई। विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर होता है। उसी मंदिर में अन्याय हुआ। विधानसभा अध्यक्ष ने लगता है पार्टी के दबाव में सदस्यता रद्द की है। वैसे कांग्रेस मुझपर डोरे डाल रही थी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर फैसला लिया

मैंने पवई विधायक के मामले में पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित निर्णय के आधार पर फैसला लिया था। ऐसा ही फैसला पूर्व में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने भी लिया था। फैसले की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त होने पर विधि विशेषज्ञों से चर्चा कर अगला निर्णय लिया जाएगा।

विधायक बने रहेंगे

प्रहलाद लोधी को सांसदों और विधायकों के मामले देखने वाली स्पेशल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा के आदेश पर हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के बाद वे यथावत विधायक बने रहेंगे। विधायक को सजा कोर्ट ने सुनाई थी और उस आदेश पर हाईकोर्ट ने स्थगन आदेश जारी कर दिया है। राजनीतिक द्वेष के चलते लॉ पॉइंट्स पर छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। जब सजा ही स्थगित हो गई है तो उनकी विधायकी भी पूर्ववत ही रहेगी। इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष द्वारा नए सिरे से कोई आदेश आदि की न आवश्यकता है और न ही उसका कोई औचित्य होगा।