वेस्ट पेपर को रिसाइकल कर बन सकेंगे अच्छी क्वालिटी के पेपर

वेस्ट पेपर को रिसाइकल कर बन सकेंगे अच्छी क्वालिटी के पेपर

भोपाल राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के सेंट्रल वर्कशॉप में ‘वेस्ट पेपर रिसाइकल मशीन’ तैयार की गई है। इससे वेस्ट व यूज्ड पेपर को रिसाइकल कर अच्छी क्वालिटी का पेपर तैयार किया जा सकता है। इस मशीन से न केवल मूल क्वालिटी जितना पेपर बनता है, बल्कि इससे विभिन्न रंगों के पेपर बनाए जा सकते हैं। प्रो. प्रशांत शर्मा के अनुसार आरजीपीवी सहित बड़े संस्थानों में वेस्ट व यूज्ड कई टन पेपर फेंक दिया जाता है या उसे जला दिया जाता है। इससे पैसों की बर्बादी के साथ ही पर्यावरण को नुकसान होता है। बाजार में अभी तक उपलब्ध मशीनें वेस्ट पेपर से गत्ते या कम स्तर वाला पेपर तैयार कर पाती हैं। यहां से उन्हें आइडिया मिला और कुलपति प्रो. सुनील कुमार के मार्गदर्शन में लंबे शोध के बाद ऐसी मशीन तैयार की। आरजीपीवी सेंट्रल वर्कशॉप के एचओडी एसोसिएट प्रो. प्रशांत शर्मा द्वारा टीम मेम्बर्स असिस्टेंट प्रो. सुनील, प्रो. अजय और प्रो. बृजेन्द्र के सहयोग से तैयार इस वेस्ट पेपर रिसाइकल मशीन का पेटेंट भी करा लिया गया है।

20 से 25 हजार रुपए में बनेगी मशीन

यह मशीन 20 से 25 हजार रुपए में 4 गुणा 5 फीट साइज की तैयार हो जाएगी। इस मशीन को 10 गुणा 10 फीट के कमरे में लगाकर आरजीपीवी और बीयू जैसे अधिक वेस्ट पेपर निकालने वाले संस्थान के वेस्ट पेपर को रिसाइकल किया जा सकता है। इससे संस्थान को लाखों का फायदा होगा। इस मशीन के संचालन में मात्र दो कर्मचारी लगते हैं।

कैसे काम करेगी वेस्ट पेपर रिसाइकल मशीन

सबसे पहले वेस्ट पेपर की कटिंग का उससे ठोस व खराब हिस्से को अलग किया जाता है। इसके बाद पल्पिंग कर लुगदी तैयार की जाती है। इस दौरान डी-इंकिंग कर उसकी स्याही आदि निकाल दी जाती है, फिर सरफेक्टेंट (केमिकल का इस्तेमाल) कर अन्य कलर भी निकाले जाते हैं। इस पल्प को रोलर से गुजारकर निर्धारित ए-3, ए- 4 या अन्य साइज के सांचों में ढाल लिया जाता है। अंत में गीलापन (नमी) पूरी तरह निकालने के बाद फाइनल पेपर तैयार हो जाता है।