शाह के दौरे से चिढ़ा चीन, फिर अरुणाचल पर जताया दावा

शाह के दौरे से चिढ़ा चीन, फिर अरुणाचल पर जताया दावा

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में पहुंचे। गृह मंत्री के इस दौरे से पड़ोसी मुल्क चीन को दिक्कत हुई है और चीन ने इसका विरोध किया है। चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश पर अपना हक जताता रहा है, लेकिन भारत ने हर बार उसके दावे को नकारा है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने गुरुवार को अमित शाह की इस यात्रा पर बयान दिया और कहा कि वह इसका विरोध करते हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है और ऐसे में जबतक इसका हल नहीं निकल जाता, तो राजनीतिक यात्राओं से बचना चाहिए। हालांकि भारत ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अरुणाचल की यात्रा पर चीन के ऐतराज को खारिज करते हुए गुरुवार को दोहराया कि अरुणाचल भारत का अखंड एवं अविभाज्य हिस्सा है तथा भारतीय नेताओं के देश के किसी राज्य के दौरे पर बाहरी देश के आपत्ति करने का कोई कारण नहीं बनता है।

20 फरवरी को मिला था पूर्ण राज्य का दर्जा: बता दें कि आज अरुणाचल प्रदेश का पूर्ण राज्य दिवस है, 20 फरवरी को ही अरुणाचल प्रदेश को राज्य का दर्जा मिला था। इसी अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ईटानगर पहुंचे हैं और यहां पर जश्न में शामिल हुए।

अनुच्छेद 371 को लेकर अफवाहों पर ध्यान न दें

पूर्वोत्तर की अनोखी संस्कृति की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद दुष्प्रचार किया जा रहा था कि इस क्षेत्र में अनुच्छेद 371 को भी निरस्त कर दिया जाएगा। ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें। गौरतलब है कि अनुच्छेद 371 के तहत विशेष दर्जा रखने वाले अधिकतर राज्य पूर्वोत्तर में हैं। इस अनुच्छेद का मकसद उनकी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कानूनों का संरक्षण है। अरुणाचल प्रदेश के 34वें स्थापना दिवस के मौके पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा कि 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री का पद संभाला था, उसके पहले पूर्वोत्तर शेष भारत के साथ सिर्फ भौगोलिक रूप से जुड़ा हुआ था।

पहले भी चीन कर चुका है विरोध: अमित शाह से पहले भी कई नेताओं की यात्रा पर चीन की ओर से सवाल खड़े किए जा चुके हैं। प्रवक्ता ने कहा कि चीनी सरकार ने कभी भी इसे अरुणाचल प्रदेश नहीं माना है। भारतीय नेताओं को उस स्थान पर जाने से बचना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय बोला कि ऐसी यात्राओं का असर दोनों देशों के संबंध पर पड़ सकता है। गौरतलब है कि ना सिर्फ अरुणाचल प्रदेश बल्कि चीन से सटे कई अन्य इलाकों में भी वहां की सेना घुसपैठ करती आई है।