सीएम की राज्यपाल से मुलाकात, बोले- समय पर होंगे निकायों के चुनाव

सीएम की राज्यपाल से मुलाकात, बोले- समय पर होंगे निकायों के चुनाव

भोपाल ।   महापौर के चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से कराए जाने के अध्यादेश को लेकर चल रहे टकराव के बीच मुख्यमंत्री कमल नाथ ने सोमवार शाम राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात की। अब मामले के पटाक्षेप के आसार है। मुख्यमंत्री की ओर से दावा किया गया कि निकाय के चुनाव समय पर ही होंगे। उन्होंने राज्यपाल की नाराजगी की खबरों का खंडन करते हुए कहा कि इस अध्यादेश पर राज्यपाल की पहले से सहमति है। मुख्यमंत्री ने राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा के बयान से पल्ला झाड़ लिया है। तन्खा ने रविवार को इस अध्यादेश को लेकर राज्यपाल को राजधर्म निभाने की नसीहत दी थी। इसके बाद राजभवन और राज्य सरकार के बीच टकराव की खबरें सुर्खियों में थी। जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने राज्यपाल से सीएम की मुलाकात को सौजन्य भेंट बताया है। उन्होंने पत्रकार वार्ता में बताया कि कमल नाथ ने महापौर के चुनाव अप्रत्यक्ष तौर पर कराए जाने के बारे में राज्यपाल को विस्तृत जानकारी दी और राज्य सरकार का पक्ष रखा। वहीं, मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई है कि राज्यपाल इस संबंध में राज्य हित में निर्णय लेंगे। पत्रकारों से मुख्यमंत्री ने कहा कि रोक टोक की बात पहले भी नहीं आई और आगे भी नहीं आएगी। मुख्यमंत्री ने अध्यादेश के अलावा राज्यपाल से बाढ़ को लेकर चर्चा हुई हैं। इधर,राज्यपाल अध्यादेश को होल्ड पर रखा है। वे एक्सपर्ट से राय लेंगे। वहीं, पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और उमा भारती ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात की और इस अध्यादेश को रद्द करने की मांग की।

जनता के द्वारा चुनाव कराना ज्यादा लोकतांत्रिक: सोलंकी

हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने महापौर के चुनाव पार्षदों से कराने के अध्यादेश मामले पर कहा कि संविधान का पालन करना ही राजधर्म है। उन्होंने कहा कि जनता महत्वपूर्ण होती है जो चीज जनता के द्वारा होती है वह ज्यादा लोकतांत्रिक है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के पास तीन विकल्प है। सोलंकी सोमवार को भोपाल में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।

शिवराज बताएं कि पूर्व के चुनावों में कितने खरीदे थे पार्षद: गुप्ता

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने भाजपा के विरोध को ढोंग बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को चुने जाने योग्य पार्षदों पर बिकने की आशंकाएं व्यक्त करने के पहले जनता को यह बताना चाहिए कि जब उनके नेता उमाशंकर गुप्ता अप्रत्यक्ष प्रणाली से मेयर चुने गए थे,तब उन्होंने पार्षदों की क्या कीमत लगाई थी।