कागजों पर बनी युवाओं को 100 करोड़ देने वाली कंपनी, अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला

कागजों पर बनी युवाओं को 100 करोड़ देने वाली कंपनी, अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला

भोपाल ।   सन् 2013 में सत्ता में वापस आने के बाद पिछली सरकार ने 2014 में मोदी के स्टार्टअप इंडिया अभियान घोषित होते ही 100 करोड़ रुपए के एक वेंचर कैपिटल फंड प्रदेश के युवा उद्यमियों के लिए जुटाने की घोषणा की थी। शुरुआत में प्रदेश में ‘स्टार्टअप इंडिया’ के लिए 2015 आते एक स्टार्टअप नीति भी बन गई, लेकिन आज पांच साल बाद न तो किसी युवा या स्टार्टअप को कोई वित्तीय मदद मिली, न ही ये फंड (राशि) आया। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हैदराबाद में ‘मध्य प्रदेश’ के करोड़ों रुपयों के आयोजन ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2016’ के लिए उद्योगपतियों को न्योता देते हुए इस फंड और नई स्टार्ट उप नीति की घोषणा भी की थी।

फंड जुटाने एमपी वेंचर फंड कैपिटल लिमिटेड बनाई गई

एक उच्च पदस्थ सूत्र के मुताबिक, ‘राज्य में पहले फंड की घोषणा हुई, फिर इन्क्यूबेशन और स्टार्टअप नीति बनी, एक कंपनी एमपी वेंचर फंड कैपिटल लिमिटेड भी बनी, इस कंपनी का एक प्रबंध निदेशक भी नियुक्त हुआ और राज्य के प्रमुख वित्तसचिव इसके अध्यक्ष बने, लेकिन यह फंड एक कोरी राजनैतिक घोषणा बन कर रह गया। इस कंपनी का काम फंड जुटाना था, मसलन डीएफआईडी या व्यावसायिक बैंक के माध्यम से इसमें धन लाना था, लेकिन विवादों के चलते ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। बाद में कंपनी के प्रबंध निदेशक भी इस कंपनी को छोड़ कर चले गए।’

कंपनी की चार साल में हुई सिर्फ एक बैठक

इस कंपनी को सेबी में पंजीकृत कर लिया गया। इतने वर्षों में योजना के क्रियान्वयन के नाम पर मात्र एमएसएमई फंड ट्रस्ट और मध्य प्रदेश वेंचर फाइनेंस लिमिटेड (एमपीवीएफएल), जो निवेश प्रबंधक के रूप में कार्य कर रही है, का गठन मात्र हुआ है और चार सालों में केवल एक ही वार्षिक बैठक सन् 2016 में हुई है। इस फंड को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना से भी जोड़ा जाना था। ये कंपनी अब तक व्यावहारिक रूप में काम शुरू नहीं कर सकी है। न निवेशक आए और न ही नए उद्यम लगाने के लिए कंपनी फाइनेंस कर पा रही है।

कर्ज देने के चलते करना पड़ा जांच का सामना

सूत्र के मुताबिक पहले ही उद्योगों को छोटी समय सीमा के लिए उद्योगपतियों को मध्य प्रदेश औद्योगिक केंद्र विकास निगम द्वारा कर्ज देने के कारण कई वरिष्ठ अधिकारियों को जांच का सामना करना पड़ा। ऐसे में राजनैतिक घोषणाएं जल्दी अमल में आने से पहले ही दम तोड़ चुकी होती हैं।

कितना आया फंड, नहीं बता पाया कोई

पिछले लगभग तीन वर्षों में कितना फंड इस कंपनी में आया और कितने युवा लाभान्वित हुए। ये ऐसे प्रश्न हैं, जिसका जवाब न वित्त विभाग के पास है और न ही सूक्ष्म एवं लघु उद्योग (एमएसएमई ) विभाग के पास। पीपुल्स सामाचार ने इन प्रश्नों के जवाब जानने की कोशिश की, लेकिन संबंधित विभागों के अधिकारी सवालों से बचते रहे।