कांग्रेस ने की ‘बैलेट’ की डिमांड भाजपा ने कहा-दुरुपयोग होगा

कांग्रेस ने की ‘बैलेट’ की डिमांड भाजपा ने कहा-दुरुपयोग होगा

भोपाल। नगरीय निकायों के चुनाव को लेकर भाजपा तैयारियों में जुट गई है। इस संबंध में पार्टी ने 17 जनवरी को विशेष बैठक बुलाई है,जिसमें प्रदेश और जिलों के पदाधिकारियों के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी बुलाया गया है। इसमें फीड बैक लेने के साथ ही नगरीय निकाय चुनाव के बारे में दिशा निर्देश भी दिए जाएंगे। दूसरी ओर, नगरीय निकाय चुनाव से पहले एक बार फिर ईवीएम मशीन की विश्वसीनयता पर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस ने पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ की तर्ज पर चुनाव ईवीएम मशीन की बजाय मतपत्र से कराए जाने की मांग उठाई है। कांग्रेस का कहना है कि ईवीएम से नतीजे प्रभावित होते हैं। वहीं, भाजपा ने आरोप लगाया है कि मत पत्र से चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग होगा। फिलहाल इसे लेकर दोनों दल आमने-सामने आ गए है।

ईवीएम से मतदान का अनुभव ठीक नहीं: जेपी

प्रदेश कांग्रेस एक एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को प्रवक्ता जेपी धनोपिया के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य आयुक्त से मुलाकात कर आगामी निकाय चुनाव ईवीएम के स्थान पर मतपत्र से कराए जाने की मांग की। इस दौरान उनके साथ उपाध्यक्ष संगठन प्रभारी चन्द्रप्रभाष शेखर, महामंत्री राजीव सिंह और उपाध्यक्ष प्रकाश जैन थे। धनोपिया ने बताया कि पिछले चुनाव का मतदान ईवीएम मशीन से हुआ था, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में विधान सभा चुनाव 2018 एवं लोकसभा चुनाव 2019 में ईवीएम से हुए मतदान का अनुभव संतोषजनक नहीं रहा है। ऐसी स्थिति में आगामी नगरीय निकाय के समस्त चुनाव ईवीएम के स्थान पर मतपत्र के द्वारा ही कराए जाने की व्यवस्था की जाए।

मप्र को फिर से लालटेन युग में ले जाने की साजिश : राकेश

भाजपा नगरीय निकाय के चुनाव ईवीएम से कराने के पक्ष में है। प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि नगरीय निकाय चुनाव के आने वाले परिणामों से भयभीत होकर ईवीएम की जगह वह बैलेट पेपर से चुनाव चाहती है, ताकि सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग कर के चुनाव में धांधली कर सके। प्रदेश में कांग्रेस ने चुनाव के पहले घोषणा पत्र में जो वादे किए थे उसे पूरा नहीं कर पा रही है। जनता में सरकार को लेकर आक्रोश है, जिसे कांग्रेस पूरी तरह जान गई है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां कांग्रेस की सरकार बन जाती है, वहां कांग्रेस की ईवीएम को लेकर कोई टिप्पणी नहीं होती और प्रश्नचिन्ह नहीं खडे होते। लेकिन जहां परिणाम कांग्रेस के अनुकूल नहीं आते हैं तो वहां ईवीएम में गडबडी की शिकायत होती है।

नगरीय निकायों में प्रशासकीय समितियों को बैठाने की तैयारी

भोपाल। नगरीय निकायों के चुनाव मई-जून तक टल सकते हैं। यही कारण है कि दर्जनभर से ज्यादा रिक्त हुए अध्यक्ष और महापौर पदों पर प्रशासक नियुक्त किए गए हैं। वहीं अंदरखाने की माने तो आने वाले समय में निकायों की बागडोर प्रशासकीय समितियों को दी जा सकती है। समिति में कोई पद नहीं होता बल्कि पांच सदस्य होते हैं। यह समिति हर निर्णय लेने में सक्षम होगी। नगरीय निकायों में वार्डों और पदों के आरक्षण की प्रक्रिया जारी है। क्योंकि फरवरी के दूसरे पखवाड़े में प्रदेश के अधिकांश निकायों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। वहीं माना जा रहा है कि चुनाव प्रक्रिया छह माह के लिए आगे बढ़ाई जा सकती है। इस दौरान निकायों में प्रशासकीय समितियां बैठाई जा सकती हैं। समितियों को लेकर नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने विधि एवं विधायी विभाग से अभिमत भी मांगा था। निकायों में प्रशासकीय समितियां बैठाई गर्इं तो कांग्रेस के बड़ी संख्या में नेताओं को एडजेस्ट होने का मौका मिलेगा। इसको लेकर कयास लगाए जा रहे हैं, कि इससे जिनको मौका नहीं मिलेगा, उनके बीच में खींचतान भी बढ़ेगी।