याचिका का निराकरण होने तक रीगल टॉकीज पर कब्जा नहीं लेगा निगम

याचिका का निराकरण होने तक रीगल टॉकीज पर कब्जा नहीं लेगा निगम

इंदौर। शहर के बीच करीब 85 वर्ष पुराने रीगल टॉकीज पर नगर निगम 11 सितंबर तक कब्जा नहीं लेगा। टॉकीज प्रबंधन की हाईकोर्ट में 2012 से विचाराधीन प्रथम अपील पर सोमवार को जस्टिस रोहित आर्य की एकल पीठ में सुनवाई हुई। टॉकीज प्रबंधन की ओर से टॉकीज पर कब्जा लेने के लिए स्टे आवेदन पेश किया जाना था, लेकिन निगम की ओर से सीनियर एडवोकेट एके सेठी ने जानकारी दी है कि 11 सितंबर तक निगम न तो टॉकीज पर कब्जा लेगा और न तोड़फोड़ की कार्रवाई की जाएगी। निगम द्वारा सहमति देने के बाद कोर्ट ने 11 सितंबर को अपील पर सुनवाई के आदेश दिए हैं। टॉकीज प्रबंधन की ओर से सीनियर एडवोकेट अशोक चितले और विभोर खंडेलवाल ने पैरवी की। खंडेलवाल ने बताया लीज खत्म करने के निगम के निर्णय के खिलाफ टॉकीज संचालक विमल कुमार ठकुरिया एवं अन्य ने वर्ष 2012 में प्रथम अपील की है, जिसका अब तक निराकरण नहीं हुआ है। बिना उसके निराकरण के नगर निगम टॉकीज पर कब्जा नहीं कर सकता है। टॉकीज चलाने के लिए यह जमीन दी गई थी, उसका अब तक वहीं उपयोग किया जा रहा है।

वर्ष 1930 में मनोरंजन के लिए मिली थी जमीन

होलकर शासन काल में 1930 में मनोरंजन केंद्र के लिए यह जमीन दी थी, जिसके बाद 1934 में यहां रीगल टॉकीज बनकर तैयार हुआ। इससे पहले निगम ने 2008 में टॉकीज की लीज निरस्त कर उस पर कब्जा ले लिया था। बाद में मामला हाईकोर्ट गया और वहां से स्टे मिलने के बाद टॉकीज दोबारा शुरू हो सका था। लीज मामले में लापरवाही बरतने वाले कुछ अफसरों पर तब गाज भी गिरी थी। 2017 में निगम ने सड़क चौड़ीकरण के लिए टॉकीज की कुछ जमीन ली थी और नई बाउंड्रीवॉल बनवाई थी। नगर निगम लीज निरस्त कर वहां पर मल्टीलेवल पार्किंग बनाने की योजना बना रहा है। शनिवार को एसडीएम कोर्ट ने नगर निगम के पक्ष में फैसला देते हुए 48 घंटे में कब्जा लेने के आदेश दिए थे।