कटौती या कारस्तानी :बिजली इंजीनियर्स व एम्पलाईज ने सीएम से मांगा मिलने का समय

कटौती या कारस्तानी :बिजली इंजीनियर्स व एम्पलाईज ने सीएम से मांगा मिलने का समय

जबलपुर   बिजली कर्मचारियों व इंजीनियर्स के विभिन्न संगठनों के नेतृत्वकर्ता मध्यप्रदेश यूनाइटेड फोरम फॉर पॉवर एम्पलाईज एवं इंजीनियर्स ने प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर मिलने का समय मांगा है। पत्र में उल्लेखित किया गया है कि बिजली सरप्लस तो कटौती क्यों तथा कटौती या कारस्तानी जैसे अहम विषय पर वे तथ्यात्मक चर्चा करना चाहते हैं। फोरम ने यह भी आरोप लगाया है कि भाजपा के 15 साल के कार्यकाल में सीएम से मिलने की उन्होंने कई बार कोशिश की लेकिन समय नहीं दिया गया। फोरम के संयोजक इंजीनियर व्ही.के. एस. परिहार ने प्रेषित पत्र में लिखा है कि सामान्य ट्रिपिंग, तकनीकी ब्रेकडाउन, फॉल्ट एवं पूर्व निर्धारित शट डाउन जैसे कारणों के साथ सप्लाई बंद किए जाने को कटौती कहते हुए दुष्प्रचारित करना दुर्भाग्यपूर्ण है। बिजली विभाग की हकीकत जब तक सरकार व आमजनों के सामने नहीं आएगी। दुष्प्रचार पर भी विराम नहीं लगेगा।

ये आवश्यकताएं की गर्इं रेखांकित

* पिछले 15 वर्षों में अधोसंरचना तो विकसित हुई पर उसी अनुपात में नियमित कर्मचारियों की संख्या घटती चली गई।

* आउटसोर्स कर्मियों से कार्य कराना उचित नहीं है। ये न तो तकनीकी प्रशिक्षित और न सक्षम व अधिकृत हैं।

* नियमित मैदानी अधिकारियों व कर्मचारियों की बड़ी कमी को दूर किया जाना जरूरी है।

* तेलंगाना सरकार द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए अपनाई गई व्यवस्था का अध्ययन कर बेहतर नीति बनाई जाए।

* प्रदेश में तीनों विद्युत वितरण कंपनियां अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत प्रभावशील हैं, इसलिए समस्याएं बढ़ गई हैं।

* तीनों विद्युत वितरण कंपनियों को समाहित कर छत्तीसगढ़ की तर्ज पर एक व्यवस्था लागू की जाए।

1912 का प्रयोग भी पूरी तरह फेल

फोरम का कहना है कि एकीकृत उपभोक्ता सेवा केन्द्र 1912 का प्रयोग भी पूरी तरह फेल हो चुका है। यह शिकायत केन्द्र संपूर्ण प्रदेश के लिए हैं, लेकिन आंधी तूफान की स्थिति में क्षमता से ज्यादा शिकायतें आने पर उनका निराकरण ही समय पर नहीं हो पा रहा है। जिसकी समीक्षा की जाना भी बहुत जरूरी है।