बेटा खोने के बाद ब्रेस्ट मिल्क दान किया, 63 दिन में 14 किलो डोनेट

बेटा खोने के बाद ब्रेस्ट मिल्क दान किया, 63 दिन में 14 किलो डोनेट

वॉशिंगटन। अमेरिका के उत्तर मध्य स्थित विस्कॉसिन राज्य के नेल्सविले में एक महिला बच्चों की जिदंगी बचाने के लिए ब्रेस्टमिल्क दान कर रही है। पिछले 63 दिन में उन्होंने 14.1 किलोग्राम ब्रेस्टमिल्क एनआईसीयू बैंक को दान कर दिया है। दरअसल, सिएरा स्ट्रैंगफेल्ड ने पांच सितंबर को सीजेरियन से सात माह के प्रीमैच्चोर बच्चे को जन्म दिया था। जेनेटिक डिस्आॅर्डर के कारण बच्चे की मौत 3 घंटे में ही हो गई। सिएरा ने बताया कि मेरे बच्चे को ट्राइसोमी 18 नाम की दुर्लभ बीमारी थी। इस वजह से जन्म के वक्त उसका वजन मात्र 770 ग्राम था और लंबाई करीब 12.5 इंच थी। सिएरा के फैसले की तारीफ की : सिएरा ने अपना अनुभव सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, यह बेहद मुश्किल काम है, जब आपको यह पता हो कि आपका बच्चा आपके साथ नहीं है। कई बच्चों को मां का दूध नहीं मिल पाता। मेरी कोशिश ऐसे बच्चों को बचाने की है। इस पोस्ट को अब तक 23 हजार लाइक्स मिल चुके हैं और 2.8 हजार कमेंट किए हैं। इसे 6000 बार शेयर किया गया। लोगों ने सिएरा के फैसले की तारीफ की। 3 घंटे जैसे मिनटों में निकल गए: सिएरा ने बताया, गर्भ के 20वें हμते में हमें बच्चे को ट्राइसोमी 18 होने की जानकारी मिली। ऐसे में गर्भपात कराने का सवाल ही नहीं उठता था। उसके बचने की संभावना कम थी, फिर भी हमने तय किया उसे दुनिया में लाएंगे। वह 3 घंटे मेरे साथ रहा। उसके शरीर का स्पर्श ऐसा था कि घंटे मिनटों की तरह निकल गए। यही वह समय था, जब मैंने ब्रेस्टमिल्क दान करने के बारे में सोचा था।

           पहली बच्ची को डोनेशन से मिला था दूध

सिएरा ने बताया कि उनकी पहली बच्ची पोर्टर को जन्म के ठीक बाद डोनेशन से मिला हुआ दूध ही दिया गया था। उन्होंने कहा, पंपिंग कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। यह बहुत मुश्किल भरा होता है। लेकिन मैं अपने बच्चे को नहीं बचा सकी तो दूसरों की मदद करना चाहती थी।

          5 हजार में से एक को ट्राइसोमी18 होती है

नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ हेल्थ के मुताबिक, ट्राइसोमी 18 बीमारी 5000 हजार में से किसी एक बच्चे को होती है। इससे ग्रसित 75% बच्चे 24 घंटे से अधिक जिंदा नहीं रह पाते है। केवल 5% पीड़ित नवजात ही 1 साल तक जीवित रह पाते हैं। यह एक जेनेटिकिस्ट डिसआॅर्डर है। एडवर्डस सिंड्रोम के नाम से भी जाना जाता है।