नहीं पाल पा रहा था परिवार; पत्नी- बच्चों की हत्या करने के बाद की खुदकुशी

नहीं पाल पा रहा था परिवार; पत्नी- बच्चों की हत्या करने के बाद की खुदकुशी
डॉ. प्रकाश सिंह, पत्नी-सोनू सिंह, बेटी-अदिति, बेटा-आदित्य

गुरुग्राम। गुरुग्राम शहर की एक दवा कंपनी में पूर्व वैज्ञानिक रहे डॉ. प्रकाश सिंह ने रविवार की रात अपनी पत्नी और बेटे-बेटी की हत्या कर खुद फांसी लगा ली। उन्होंने सबकी हत्या बड़ी बर्बरता के साथ की है। इसके लिए सभी पर पहले हथौड़े से वार किया और बाद में फरसे से गला काट दिया। उनकी जेब से अंग्रेजी में लिखा सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उन्होंने परिवार संभालने में असमर्थता जताते हुए घटना के लिए खुद को जिम्मेदार ठहराया है। सोमवार की सुबह सेक्टर-49 स्थित पॉश सोसाइटी उप्पल साउथ एंड स्थित वैज्ञानिक के μलैट पर पहुंची पुलिस ने चारों शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। वाराणसी के रहने वाले वैज्ञानिक डॉ. सिंह रसायनशास्त्र के जानकार थे ।

पत्नी खुद के स्कूल में प्रिंसिपल थीं:

डॉ. प्रकाश सिंह की पत्नी खुद की ओर से संचालित एक स्कूल की प्रिंसिपल थीं। बेटी अदिति सिंह (19) जामिया मिलिया से बी-फार्मा की पढ़ाई कर रही थी। वह फिलहाल अंतिम वर्ष की छात्रा थी। बेटा आदित्य (14) नौवीं में पढ़ रहा था।

मामूली विरोध के प्रमाण मिले:

घटना को देखकर लगता है कि प्रकाश ने एक अपराध शो से प्रेरित होकर हमले की योजना बनाई थी। चूंकि कमरे के अंदर विरोध के मामूली साक्ष्य मिले हैं, आशंका है कि सिंह ने अपनी पत्नी और बच्चों की हत्या सोते-सोते ही कर दी हो। यह भी आशंका है कि सबके खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया होगा।

हथौड़ा मारने के बाद फरसे से काटा:

पुलिस के मुताबिक ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकाश ने पहला प्रहार बेटी अदिति पर हथौड़े से किया हो, फिर पत्नी सोनू सिंह ने प्रतिरोध करने का प्रयास किया तो उनके सिर पर हथौड़े से कई बार वार किया। आखिर में फरसे से गला काट दिया।

दवा निर्माता कंपनी में थे वैज्ञानिक:

सिंह दवा निर्माता कंपनी सन फार्मा में वैज्ञानिक थे। हालांकि, करीब एक महीने पहले उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी और हैदराबाद में करीब 20 दिन बाद नौकरी शुरू करने वाले थे। इसलिए फिलहाल वह घर पर ही रह रहे थे। दंपति की ओर से गुरुग्राम और पलवल में 4 स्कूल चलाए जा रहे थे।

नौकरानी के आने पर खुलासा हुआ:

घटना का खुलासा सोमवार की सुबह नौकरानी जूली के आने पर हुआ। जूली सुबह करीब सात बजे डॉ. सिंह के घर पहुंची। उसने कई बार घंटी बजाई, दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से जवाब न मिलने पर पुलिस को सूचना दी।