दुष्यंत कुमार संग्रहालय विचार का आंदोलन स्थल बन गया है

दुष्यंत कुमार संग्रहालय विचार का आंदोलन स्थल बन गया है

भोपाल  ।‘दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय विचार का आन्दोलन स्थल बन गया है। अभी देश में विचार का संकट है’-ये विचार व्यक्त किए वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने। वे संग्रहालय में आयोजित दुष्यंत कुमार स्मारक व्याख्यानमाला में 'ये सूरत बदलनी चाहिए' विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने अंजय तिवारी स्मृति रंग सम्मान समारोह की अध्यक्षता भी की। मुख्य अतिथि प्रख्यात रंगकर्मी और अभिनेता राजीव वर्मा थे। जबकि स्मृति सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि दुष्यंत कुमार के सुपुत्र आलोक त्यागी थे। राजीव वर्मा ने कहा कि संग्रहालय जीवंत परंपरा का संवाहक है। वहीं आलोक त्यागी ने कहा कि मंच पर जिन लोगों का सम्मान हुआ है, उन्होंने सचमुच ही सूरत बदलने का काम किया है। इस अवसर पर आरम्भ में दुष्यंत कुमार की हस्तलिखित गजल का 'बयान' पर अनावरण भी किया गया। सुनील दुबे वृक्षमित्र के सहयोग से संग्रहालय परिसर में पौधारोपण भी किया गया। समारोह के पहले चरण में अंजय तिवारी स्मृति सम्मान से रंगकर्म और साहित्य के लिए प्रसिद्ध रंगकर्मी बद्र वस्ती और हेमंत देवलेकर को सम्मानित भी किया गया।

इन विभूतियों को मिला साहित्य सम्मान

समारोह के दूसरे चरण में युगेश शर्मा को कमलेश्वर सम्मान, विनीता राहुरीकर को कन्हैयालाल नन्दन सम्मान, पुष्पेन्द्र पाल सिंह को राजेन्द्र जोशी सम्मान, सोमेन्द्र यादव को अखिलेश जैन सम्मान, पवार राजस्थानी को बालकवि बैरागी सम्मान, डॉ भैरूंलाल गर्ग को विजय शिरढोणकर सम्मान, प्रतिभा गोटीवाले को सुषमा तिवारी सम्मान, विमल भंडारी को अंशलाल पन्द्रे सम्मान, अशोक व्यग्र को ब्रजभूषण शर्मा सम्मान और चरणजीत सिंह कुकरेजा को विट्ठल भाई पटेल सम्मान से नवाजा गया। जिन हस्तियों के नाम पर सम्मान दिया गया। उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद थे।