मंटो की तीन कहानियों को लेकर मंच पर एक्सपेरिमेंट

मंटो की तीन कहानियों को लेकर मंच पर एक्सपेरिमेंट

भोपाल ।  शहीद भवन में चल रहे 17वें स्मरण हबीब राष्ट्रीय रंग आलाप नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को द राईजिंग सोसाइटी आफ आर्ट एंड कल्चर के कलाकारों ने सआदत हसन मंटो की तीन कहानियों (खुदा की कसम, आंखे, लाइसेंस) पर आधारित नाटक 'मंटो खुद’ की प्रस्तुति दी। 1 घंटे 20 मिनट के इस नाटक की मूल कहानी 'लाइसेंस' ही है, लेकिन मंटो को सिर्फ एक कहानी से नहीं समझा जा सकता, लिहाजा निर्देशक ने उनकी 'आंखें' और 'खुदा की कसम' कहानियों के भी कुछ कैरेक्टर, सिचुएशन और सींस को इसमें कुछ ऐसे जोड़ा गया कि पूरा नाटक एक ही कहानी लगता है। नाटक का पहला सीन मंटो की कहानी 'खुदा की कसम' का है, बंटवारे के दर्द को बयां करती कहानी है, लेकिन ये कहानी सिर्फ अपनों के खोने की नहीं है, ये कहानी अपनों की आंखों में जिंदा रहकर भी खो जाने की है। जहां एक बुढिय़ा अपनी बेटी को बाजार में ढूंढती है और लोगों से पूछती है क्या तुमने मेरी बेटी को देखा है? वो खूबसूरत है... इतनी खूबसूरत कि शैतान भी उसके सिर पर हाथ रखकर उसे आशीर्वाद देगा। इस बीच फेड आउट होता है और मूल कहानी 'लाइसेंस' शुरू होती है। इनायत औने-पौने दाम पर घोड़ा-तांगा बेच अब्बू की कब्र पर जाती है और कहती है कि आज तेरी इनायत कमेटी के दμ़तर में मर गई, लेकिन मंटो की इनायत अब भी जिंदा है, और ये तब तक जिंदा रहेगी जब तक मंटो की कहानियां जिंदा हैं। नाटक का अंत एक गाने से होता है जिसके बोल हैं- सच को जिंदा दफन किया, दुनिया एक ताबूत...।

नाटक का मूल मैसेज

नाटक का केंद्रीय पात्र एक स्त्री है इनायत। जो कि इस पुरुष प्रधान समाज में अपनी आजीविका, अपने सम्मान-आत्मसम्मान और पाने आस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष करती है। समाज में अकेली, बेसहारा स्त्री को किस दृष्टि से देखता है कि एक ही चेहरे के कई रूप होते है, जिनका किरदार अलग होता है।

बिहाइंड द कर्टन' नाटक 'मंटो खुद' की निर्देशिका प्रीति झा तिवारी ने बताया कि नाटक में तानाजी वावड़े ने पांच किरदार (अब्बू, दीने, मांझे, शराबी कोचवान और कमेटी के अफसर) निभाए है। मैंने बुढ़िय़ा और इनायत के किरदार में अपना रोल निभाया है। सेट, प्रॉप्स, कॉस्ट्यूम, लाइटिंग में अनूप जोशी बंटी ने शानदार की है।