हर छह माह में होगा 15 साल पुराने वाहनों का फिटनेस

हर छह माह में होगा 15 साल पुराने वाहनों का फिटनेस

इंदौर। केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने नया आदेश जारी होने के बाद से अब क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय द्वारा भी नियमों को लागू करने के लिए सख्ती का रुख अख्तियार कर लिया है। अब शहर में चल रहे उन वाहनों के खिलाफ मुहिम शुरू की जाएगी जो डेढ़ दशक पुराने हैं। इन वाहनों की फिटनेस जांच अब नए नियम के मुताबिक हर छह माह में होना है। आरटीओ से मिली जानकारी के अनुसार अब 15 साल से ज्यादा पुराने वाहनों को लेकर केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने नया आदेश जारी किया है। अब इन वाहनों का हर छह माह में फिटनेस टेस्ट कराना होगा । मानकों पर खरा नहीं उतरने पर वाहन खुद- ब-खुद चलन से बाहर हो जाएगा। मध्यप्रदेश में अब तक पुराने वाहनों को लेकर कोई नियम नहीं है। हाल ही में जारी किए गए निर्देश में सभी कमर्शियल वाहनों के फिटनेस टेस्ट की अवधि को भी बदल दिया गया है। लंबे समय से इसकी मांग की जा रही थी। नए नियमों के मुताबिक किसी भी नए वाहन को शुरुआत के आठ साल तक केवल चार बार फिटनेस टेस्ट कराना होगा। उसे इस अवधि के दौरान दो-दो साल के लिए फिटनेस किया जाएगा। इसके बाद से 15 साल तक हर साल और 15 साल पुराना होने के बाद हर छह माह में फिटनेस टेस्ट कराना होगा। आरटीओ जितेंद्रसिंह रघुवंशी ने बताया कि आदेश का पालन कराने की तैयारी की जा रही है। स्मार्टचिप को भी अपने सॉμटवेयर में परिवर्तन करना होगा। ऐसा होने से सफर सुरक्षित होगा। विशेषकर पुरानी बसें नहीं चल पाएंगी। केवल उन्हीं बसों का फिटनेस मिल पाएगा, जो पूरी तरह दुरुस्त होंगी। देश के कुछ राज्यों में 15 साल पुराने वाहनों पर सख्ती से रोक है, लेकिन मप्र में इन पर कोई पाबंदी नहीं है, इसलिए भी इस नए आदेश को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि एक नए आदेश के तहत यात्री बसों में अब व्हील चेयर का इंतजाम भी करना होगा। आने वाले समय में ये नियम कितने वाहनों को सड़क से विदा करेगा यह तो बाद में तय होगा, लेकिन ऐसे वाहन चलन में है या नहीं यह जानकारी जरूर विभाग के पास रहेगी।