हर जिले में फूड प्रोसेसिंग यूनिट का होगा विस्तार, मालवा-निमाड़ पर विशेष फोकस

हर जिले में फूड प्रोसेसिंग यूनिट का होगा विस्तार, मालवा-निमाड़ पर विशेष फोकस

भोपाल ।   राज्य सरकार ने प्रदेश के हर जिले में फूड प्रोसेसिंग यूनिट का विस्तार करने की विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। खासतौर से इसका फोकस मालवा िनमाड़ पर किया गया है। इसमें बड़ी फूड इंडस्ट्री से लेकर छोटी-छोटी इकाईयों और फूड कलस्टर तक शामिल हैं। इसमें यूनिट खोलने वाले किसानों को सरकार सब्सिडी के अलावा अन्य तरह की सहूलियत भी मुहैया कराएगी। असल में राज्य की कमल नाथ सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और प्रदेश में रोजगार सृजन के लिए अपने वचन पत्र में वादा किया हुआ है। इसके तहत उद्यानिकी एवं खाद्य- प्रसंस्करण विभाग ने फूड प्रोसेसिंग इकाईयों के लिए मुख्यमंत्री कमल नाथ ने मालवा और निमाड़ के जिलों को पहले चरण में चिन्हित किया है। यहां उद्यानिकी फसलों का काफी उत्पादन के बाद यहां बड़े निवेशकों से निवेश कराने से लेकर छोटे-छोटे उद्यमियों की इकाईयां स्थापित कराने की योजना तैयार की गई है। विभाग के अनुसार शाजापुर एवं आगर जिले में संतरा,आलू व प्याज का बेहतर उत्पादन होता है। यहां का संतरा जहां नागपुरी संतरे को टक्कर देता है तो आलू चिप्स कंपनियां हाथों-हाथ खरीद लेती हैं। इन दोनों जिलों की प्याज मप्र, उप्र, दिल्ली, कर्नाटक, बंगाल, बिहार, पंजाब समेत देशभर में पहुंचता है। बावजूद स्थानीय स्तर पर फूड प्रोसेसिंग यूनिट को लेकर कुछ नहीं है। अपने वचन को पूरा करने के लिए कमल नाथ सरकार ने तमिलनाडू की तर्ज पर मप्र में भी उद्यानिकी किसानों के लिए मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट आॅफ हॉर्टिकल्चर स्कीम (एमआईडीएच) शुरू की है। इस योजना के तहत किसान और युवा उद्यमी उद्यानिकी फसलों जैसे फल व सब्जियों के उत्पादन के बाद उनके स्टोरेज, बेहतर प्रबंधन, पैकिंग और विक्रय के जरिए अच्छा मुनाफा कमा सकते है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल खेती लाभ का धंधा बनेगी बल्कि इससे अच्छी बिजनेस इकाईयां भी स्थापित हो सकेंगी।

कलस्टर के लिए आकर्षक पैकेज

किसानों आय बढ़ाने के लिए सरकार कलस्टर बेस्ड एग्रो इंडस्ट्री पर ज्यादा जोर दे रही है। इसी तरह जिलों में फूड कलस्टर को प्रोत्साहित करने के लिए आकर्षक पैकेज तैयार किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार प्याज, आलू, धनिया, अनार के लिए शाजापुर एवं आगर-मालवा सति कई जिलों की तरह खाद्य प्रसंस्करण कलस्टर बनाए जाएंगे। फसल आधारित उद्योग लगाने के लिए किसानों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। किसान यदि उद्योग लगाएंगे तो उन्हें बकायदा अनुदान व छूट भी मिलेगी। वहीं, सरकार प्रोडक्शन के बाद इसकी बिक्री के लिए भी मदद करेगी।