प्रदेश में पहली बार मूंगफली में अच्छे फैटी एसिड पर रिसर्च होगा

प्रदेश में पहली बार मूंगफली में अच्छे फैटी एसिड पर रिसर्च होगा

ग्वालियर।   प्रदेश में मूंगफली की फसल उगाने वाले किसानों को फसल का अच्छा दाम मिल सके, इसके लिए पहली बार मंूगफली में अच्छे फैटी एसिड पर रिसर्च होगा। इसकी जिम्मेदारी राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विवि ग्वा. को दी गई है। विवि के वैज्ञानिक मंूगफली की 400 वैरायटियों की जांच करेंगे। मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद भोपाल ने कृषि विवि को मूंगफली में टिक्का रोग और अच्छे फैटी एसिड के शोध के लिए एक प्रोजेक्ट दिया है। प्रोजेक्ट दो साल का है, इसके लिए 9.30 लाख रुपए भी दिए गए हैं। साथ ही जेआरएफ भी दी है। विवि की वैज्ञानिक डॉ. सुषमा तिवारी मई-जून से मॉलिक्यूलर मारकर की मदद से मंूगफली में टिक्का डिजीज और फैटी एसिड पर रिसर्च शुरु करेंगी। इसके लिए शिवपुरी, जूनागढ़ (गुजरात) व अन्य जगहों से मंूगफली की लगभग 400 किस्में मंगाई गई हैं। इन किस्मों पर फील्ड और लैब में रिसर्च किया जाएगा। साथ ही किस्मों को मिलाकर नई किस्म भी तैयार की जाएगी। वर्ष 2010 के बाद मंूगफली की नई किस्म नहीं आई प्रदेश में वर्ष 2010 के बाद से मूंगफली में जेजीएम 23 के बाद से नई किस्म नहीं आई है। यह किस्म फील्ड में देखकर ही जारी कर दी गई थी, इसलिए इसमें टिक्का रोग से लड़ने की क्षमता और फैटी एसिड नहीं है।

 मूंगफली में अच्छे फैटी एसिड होने के फायदे  

मूंगफली का उपयोग चॉकलेट बनाने में होता है। अगर मंूगफली में फैटी एसिड अच्छा है तो इसकी डिमांड ज्यादा होती है और इस तरह की फसल उगाने वाले किसानों को फसल के दाम भी अच्छे मिलते हैं।