प्लास्टिक कचरे से बनेगा ईंधन, दौड़ेंगी हाइड्रोजन कारें

प्लास्टिक कचरे से बनेगा ईंधन, दौड़ेंगी हाइड्रोजन कारें

लंदन। ब्रिटेन से हर साल लगभग 50 लाख मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। इनमें से एक तिहाई से भी कम कचरा रिसाइकिल नहीं हो पाता। ब्रिटिश कंपनी पावर हाउस एनर्जी का कहना है कि वह इन कचरों से ईंधन बनाएगी, जिसका इस्तेमाल हाइड्रोजन कारों के लिए होगा। पावर हाउस एनर्जी ने एक ऐसी प्रक्रिया विकसित की है जिसमें यह अपशिष्ट पदार्थों के छोटे टुकड़े किए जाते हैं और फिर इसे करीब 1800 डिग्री फैरेनहाइट (815 डिग्री सेल्सियस) तापमान पर गर्म करते हैं। इससे सिंथेटिक गैस का उत्पादन होता है, जो हाइड्रोजन, मीथेन और कार्बन मोनो- आक्साइड का मिश्रण है। सिंथेटिक गैस को जलाकर बिजली का उत्पादन किया जा सकता है या इससे हाइड्रोजन अलग कर वाहनों में ईंधन के रूप में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। हाइड्रोजन ईंधन सेल वाले वाहन इलेक्ट्रिक मोटर्स से संचालित होते हैं। जब तक सेल को हाइड्रोजन और आक्सीजन की आपूर्ति मिलती रहती है, यह बिजली पैदा करता रहता है।

जापान में 2025 तक 2 लाख हाइड्रोजन कारें होंगी

कंपनी के अनुसार ट्रांसपोर्ट के लिए हाइड्रोजन बेहतर ईंधन है। बड़े ट्रकों और बसों के लिए भविष्य में ऐसी ही ईंधन का इस्तेमाल किया जाएगा। अभी बड़ी समस्या हाइड्रोजन μयूल स्टेशन की है। ब्रिटेन में ऐसे स्टेशन 20 से भी कम हैं। जापान का लक्ष्य है कि 2025 तक वहां की सड़कों पर दो लाख हाइड्रोजन कारें होंगी।

कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी

अमेरिका की गैर-लाभकारी संस्था यूनियन आफ कंसर्नड साइंटिस्ट्स के अनुसार, हाइड्रोजन कारें पारंपरिक वाहनों की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में 30% से अधिक की कमी कर सकती हैं। पावर हाउस एनर्जी की ब्रिटेन में 11 जगहों पर प्लास्टिक कचरे से ईंधन बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की योजना है।

हाइड्रोजन कार के फायदे

बैटरी से चलने वाली कारों की तुलना में हाइड्रोजन ईंधन वाली कारों के दो फायदे हैं। पहला, कार को लंबी दूरी तक ड्राइव किया जा सकता है। दूसरा, ईंधन भरने में कुछ ही समय लगता हैं, जबकि बैटरी को चार्ज करने में घंटों लगते हैं।