टेंशन फ्री और डिसिप्लिन लाइफ के बताए फंडे

टेंशन फ्री और डिसिप्लिन लाइफ के बताए फंडे

भोपाल। गांधी मेडिकल कॉलेज में बुधवार को कॉलेज आॅडिटोरियम में टेडएक् स टॉक का आयोजन हुआ। इस दौरान देशभर से आंत्रप्रेन्योर्स, डॉक्टर्स, यूट्यूबर्स और तमाम आइडियोलॉजी के गेस्ट स्पीकर्स ने स्टूडेंट्स से अपनी सक्सेस स्टोरी को शेयर किया। इस दौरान डॉ. सुमेर कुमार सेठी - रेडियोलॉजिस्ट (एक्सरे विशेषज्ञ), यूट्यूबर्स और मेडिकल स्टूडेंट पवित्र शंकर, जनसम्पर्क आयुक्त पी नरहरि, 2019 की महिला आईएएस टॉपर सृष्टि देशमुख, आंत्रप्रेन्योर विशाल मिश्रा, नाहिया हुसैन, मनु गुप्ता और आईपीएस आरिफ शेख ने अपनी सक्सेस स्टोरी शेयर की। इस दौरान बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।

मेडिकल स्टूडेंट्स की लाइफ से जुड़ी बातों के बनाती हूं वीडियोज

दिल्ली मेडिकल कॉलेज की स्टूडेंट पवित्रा शंकर ने अपनी जर्नी के बारे में बताया कि किस तरह उन्होंने अपनी राह बदलते हुए यूट्यूब पर वीडियोज बनाकर लाइफ को टेंशन फ्री रखने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि यह बात जनवरी 2019 की है जब उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर पहला वीडियो अपलोड किया था। अपने फ्रंट कैमरे से एक छोटे से रूम में वीडियो बनाया और कुछ ही देर में उसे डिलीट कर दिया था। शायद तब उतना कॉन्फिडेंस नहीं था। लेकिन उन्होंने हिम्मत करते हुए वहीं वीडियो फिर से अपलोड किया और सो गर्इं। जब सुबह उठी तो उसमें एक एक्साइटमेंट था कि कितने व्यूज मिले होंगे और जब देखा तो उम्मीद से ज्यादा मिले। उन्होंने तब ही सोच लिया था कि एक मेडिकल स्टूडेंट की लाइफ बोरिंग नहीं होगी। तब से उन्होंने 16 वीडियोज बनाए। इन सभी वीडियोज में खास बात यह है कि यह सभी मेडिकल से जुड़ी जिंदगी के होते हैं।

आईपीएस बनने के बाद लाइफ ज्यादा डिसिप्लिन

कम्युनिटी पुलिसिंग के लिए इंटरनेशनल एसोसिएशन आॅफ चीफ आॅफ पुलिस (आईएसीपी) अवॉर्ड ने नवाजे गए आईपीएल आरिफ शेख ने बताया कि मैं अपनी फैमिली में फोर्थ जनरेशन का पुलिसमैन हूं। परदादा जी, दादाजी और पिताजी पुलिस में अलग-अलग रैंक पर सेवाएं दे चुके हैं। उन्हें देखते हुए बड़ा हुआ तो शुरू से ही मन में पुलिस में जाने की इच्छा रही। बचपन में हम जहां रहते थे, वहां पुलिस के बड़े अधिकारियों को देखते थे और उनका रूतबा भी देखते थे। तब यह अनुभव हुआ था कि पुलिस में बड़े अधिकारियों को कितनी इज्जत मिलती है। बस इन्हीं वजहों से आईपीएस बना हंू। उन्होंने कहा कि यूपीएससी में असफलता को लेकर अस्पष्टता वाली स्थिति रहती है। मैंने पुणे में गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और ढाई साल तक नौकरी की ताकि वर्क एक्सपीरियंस भी हो जाए। इसके बाद ही मैंने यूपीएससी के लिए प्रिपरेशन शुरू किया। यूपीएससी एग्जाम में 20 साल के क्वेश्चन पेपर देखे और एनालिसिस किया और तैयारी की। आईपीएस बनने के बाद लाइफ ज्यादा डिसिप्लिन हो गई है।

मेडिकल की पढ़ाई के दौरान चलाया स्टार्टअप

गांधी मेडिकल कॉलेज के इंटर्न स्टूडेंट रहे मनु गुप्ता ने बताया कि उन्होंने अपने कॉलेज के दौरान 2014 में फूड डिलीवरी कंपनी बनाई थी। उस समय में भोपाल में ऐसा कोई भी फूड डिलीवरी एप नहीं था। कंपनी चलाते समय मैंने कई चीजों पर अपना फोकस बनाए रखा। मैंने मीडियल की पढ़ाई करते हुए अपनी कंपनी डाली और टेक्नोलॉजी को अपना साथी बनाया। मैंने टेक्नोलॉजी को समझा और कंपनी को शुरू। वहीं कुछ स्टार्टअप कन्वेंशन में भी मैंने पार्टिसिपेट भी किया और कई कैश प्राइज जीते। लेकिन जो फंड जीता उससे भी काम नहीं चला। मैं स्टार्टअप के दौरान मेडिकल की पढ़ाई भी करता गया और साथ में काम भी करता गया। मैंने बहुत कुछ सीखा और आज इस मुकाम पर हूं कि अगर कोई मुझसे स्टार्टअप से जुड़ी कोई भी बात अगर पूछता है तो मैं आसानी से गाइड कर देता हूं। मनु गुप्ता ने एक पाई चार्ट पर 24 घंटे की दिनचर्या को समझाते हुए बताया कि मैंने हमेशा अपना कीमती समय अपने स्टार्टअप को देने की पूरी कोशिश की। कभी भी आराम की जिंदगी में कोई इंसान सफल नहीं हो सकता।