दयोदय स्थित नगर निगम की गौशाला में रोज मर रहे गौ वंश

दयोदय स्थित नगर निगम की गौशाला में रोज मर रहे गौ वंश

जबलपुर ।   तिलवारा घाट में नगर निगम द्वारा दयोदय स्थित गौशाला में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। यहां पर प्रतिदिन कम से कम 5 गौ वंश दम तोड़ रहे हैं। यहां मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि ये पशु पन्नी खाकर आते हैं और यहां पर दम तोड़ देते हैं। हैरत की बात यह है कि नगर निगम क ा एक भी कर्मचारी यहां पर नहीं है और ठेके के 22 कर्मचारियों पर यहां का दारोमदार है। गौशाला में कम से कम 500 पशु हैं। जिनमें ज्यादातर गाय हैं। इसके अलावा सांड व बैल भी यहां पर हैं। ये सब वे पशु हैं जिन्हें हांकागैंग पकड़कर लाता है। पशुओं की संख्या कम ज्यादा होती रहती है क्योंकि पशु पालक अपने पशुओं को जुर्माना अदा कर ले जाते हैं। यहां पर छोटे पशु यानि बछिया या छोटी गाय के 1 हजार रुपए परिवहन शुल्क व 50 रुपए प्रतिदिन खाना शुल्क लिया जाता है। वहीं बड़े पशुओं के लिए यह राशि 2हजार रुपए है।

कैसे मर रहे पशु

मौके पर जाकर देखने पर नजर आया कि पशुओं के लिए अलग-अलग बाड़े बने हैं। जिस बाड़े में ज्यादा जानवर हैं वहां पर कम जगह में बहुत ज्यादा गौ वंश को भर दिया गया है। यहां पर भूसे और पानी की व्यवस्था तो नजर आई मगर यहां पर बलिष्ट पशु कब्जा किए रहते हैं,कमजोर व सीधे पशु भूसे तक पहुंच ही नहीं पाते। नतीजतन में भारी भीड़ में फंसे रहते हैं और भूख से दम तोड़ देते हैं।

पन्नी भी एक कारण

ठेका कर्मी का दिया तर्क भी एक हद तक सही हो सकता है कि पशु पन्नी खाकर यहां पहुंचते हैं। ऐसी हालत में उन्हें उपचार मिलना जरूरी है। जो कि यहां पर नहीं मिल पाता। यहां पर भूसे और पानी की व्यवस्था नजर आई। दूध देने वाले पशुओं के लिए अलग शेड बना हुआ है,जहां व्यवस्थाएं कुछ बेहतर दिख रही हैं। उपचार की व्यवस्था नहीं यहां पर रहने वाले पशुओं में से कई बीमार होते हैं जिनके उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है। वेटरनरी से एक चिकित्सक की दवाओं सहित यहां पर ड्यूटी होनी चाहिए। उपचार के अभाव में भी पशु दम तोड़ रहे हैं। जिनकी फि क्र किसी को नहीं है।

संवेदनाओं का अभाव

फैक्ट फाइल मौके पर 4 पशु मृत एक ही बाड़े में पड़े हुए थे। वहीं दूसरे बाड़े में एक गाय दम तोड़ने की कगार पर थी। मरे हुए पशुओं की किसी कर्मचारी को फिक्र नहीं थी जबकि मौके पर ही कम से कम 2 दर्जन कर्मचारी नजर आ रहे थे। पूछे जाने पर पता चला कि हांका गैंग के अंतर्गत यहां की देखरेख होती है,मगर एक भी ननि कर्मी यहां पर नहीं आता है। यहां की व्यवस्था ठेक ा कर्मियों के भरोसे रहती है।