पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने को लेकर सरकार किसी के दबाव में नहीं:बाला बच्चन

पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने को लेकर सरकार किसी के दबाव में नहीं:बाला बच्चन

भोपाल। मध्यप्रदेश में पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लेकर चल रहे असमंजस के बीच गृहमंत्री बाला बच्चन ने दावा किया है कि इस मुद्दे पर सरकार किसी के दबाव में नहीं है। सभी पक्षों पर फैसला करने के बाद इस पर विचार किया जाएगा। प्रदेश में ड्रग माफियाओं के खिलाफ जारी अभियान प्रहार के बारे में जानकारी देने के लिए रविवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में बुलाई गई पत्रकार वार्ता में गृह मंत्री बाला बच्चन पुलिस आयुक्त प्रणाली से जुड़े सवालों का जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने दावा किया कि मप्र में पिछले आठ माह में अपराध दर में कमी आई है। सीएम कमलनाथ के निर्देश पर मिलावटखोरों को रासुका तक में बंद किया जा रहा है और अवैध मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ नॉरकोटिक्स और पुलिस विभाग द्वारा आपरेशन ‘प्रहार‘ चलाया जा रहा है। यह अभियान एक अगस्त से शुरू किया गया है तथा 31 अगस्त तक व्यापक स्तर पर माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि ड्रग माफियाओं के खिलाफ पूर्व की सरकार से लगभग तीन गुना कार्रवाई की गई है। आपरेशन प्रहार के तहत तस्करों और माफियाओं के खिलाफ अभियान लगातार जारी है।

2 हजार से ज्यादा लोगों के खिलाफ कार्रवाई

1 जनवरी से 31 जुलाई 2016 में स्मैक, अफीम, गांजा, चरस इत्यादि के 464 प्रकरण दर्ज कर 680 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इसी प्रकार 2017 की इस अवधि में 577 प्रकरणों में 812 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। वर्ष 2018 में इस अवधि के दौरान 967 प्रकरणों में 1354 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। कमलनाथ सरकार के आते ही ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया और 1 जनवरी से 31 जुलाई 2019 के बीच 1623 प्रकरणों में अवैध मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की गई । और 2129 आरोपियों पर कार्रवाई की गई।

नशामुक्ति अभियान के तहत 6 लाख युवाओं से संवाद

गृह मंत्री बच्चन ने बताया कि मप्र के भविष्य को प्रदेश की प्रगति की दिशा निर्धारित करने के लिए उन्हें नशे का आदी नहीं होने देंगे, इसलिए नशामुक्ति जनजागृति अभियान भी प्रारंभ किया गया है। जिसमें युवाओं, स्कूली-कालेज छात्रों, आमजनों के बीच पहुंचकर उन्हें नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया जा रहा है। एक महीने चलने वाले इस जनजागृति अभियान का नाम प्रतिकार निर्धारित किया गया है। समूचे मध्यप्रदेश में 6 लाख युवाओं से वरिष्ठ अधिकारियों ने संवाद स्थापित किया है। लघु फिल्मों, पॉवर पाइंट प्रजेंटेशन इत्यादि के माध्यम से उन्हें नशे के खिलाफ खड़े होने के लिए प्रेरित किया गया है।