भारी बारिश का कहर और आयात पर रोक इस साल आसमान छुएंगे दालों के भाव

भारी बारिश का कहर और आयात पर रोक इस साल आसमान छुएंगे दालों के भाव

भोपाल इस साल दालों के दाम आसमान छुएंगे, क्योंकि भारी बारिश के कारण दलहनी फसलें बर्बाद 35 से 70 प्रतिशत तक चौपट हो गई हैं। नतीजे में दालों के दामों में सिर्फ महीनेभर में ही डेढ़ गुना तक बढ़ोतरी हो चुकी है। दामों में यह बढ़ोतरी अभी आगे और भी जारी रहेगी, क्योंकि केंद्र सरकार ने दालों के आयात पर रोक लगा दी है। नतीजे में म्यांमार, कनाडा और इथियोपिया जैसे अफ्रीकन देशों से आने वाली तुअर दाल नहीं आने से भारतीय बाजारों में कमी बढ़ती जा रही है। इस साल मप्र के संदर्भ में दाल-रोटी खाओ, प्रभु के गुण गाओ वाली कहावत गलत साबित होने वाली है, क्योंकि दालों के दाम में लगातार बढ़त बनी हुई है। आलम यह है कि सिर्फ सितंबर और अक्टूबर के मुकाबले नवंबर माह की शुरुआत में ही दालों के दामों में डेढ़ गुना से ज्यादा की बढ़त हो चुकी है। ऐसे में राज्य सरकार के सामने सस्ती दाल मुहैया करवाने की चुनौती है, जिसके लिए स्टॉक लिमिट लागू करने की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। हालांकि इससे भी ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि मंडियों से लेकर व्यापारियों के पास स्टॉक ही नहीं बचा है।

किसानों के दबाव में लगाया आयात पर रोक

किसानों की आय दो गुनी करने के साथ ही फसलों के लागत मूल्य वापसी के तहत केंद्र सरकार ने दालों के आयात पर रोक लगाया है। इससे किसानों को कुछ फायदा जरुर हुआ है, लेकिन बरसात के कारण फसलों के बर्बाद हो जाने से उत्पादन बीते साल के मुकाबले 50 से 70 %ही हो सका है। किसानों और व्यापारियों के आंकलन के अनुसार उड़द की फसल 70 से 80% तक, मूंग 40 से 65 प्रतिशत और तुअर 30 से 35 %तक बर्बाद हो गई है।

रकबा और पैदावार में देश में मप्र अव्वल

मप्र में दालों का रकबा एवं उत्पादन देश में अव्वल है। दलहन का रकबा करीब 55.11 लाख हेक्टेयर, उत्पादन करीब 48.28 लाख टन होता है। यह देश के दलहन के अंतर्गत रकबा में मप्र की हिस्सेदारी 24 % है , उत्पादन में लगभग 28 %है। हालांकि इसमें बीते वर्षों में कमी आना शुरु हो गई है, क्योंकि वैकल्पिक फसलों को किसान अपना रहे हैं। साथ ही किसान अब कैश क्राप में शुमार फल और सब्जियों की खेती की ओर मुडेÞ हैं।