600 एकड़ में से कितनी जमीन पर कब्जा, पता लगाने होगा सर्वे

600 एकड़ में से कितनी जमीन पर कब्जा, पता लगाने होगा सर्वे

भोपाल। वर्ष 2001 में सरकारी घोषित ईदगाह ड्योढ़ी की 600 एकड़ जमीन पर कितने लोग मकान बनाकर रह रहे हैं और कितनी जमीन पर अतिक्रमण है। वर्तमान में कितनी सरकारी जमीन खाली पड़ी है। यह रिकॉर्ड खंगालने के लिए जिला प्रशासन की टीम जल्द ही सर्वे करेगी। कलेक्टर तरुण पिथोड़े जल्द ही टीम बनाएंगे। इसकी कवायद शुरू हो गई है। इधर सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2018 में जारी हुए आदेश के तहत ही यह सर्वे होगा। दरअसल बीते दिनों सीएस एसआर मोहंती ने मर्जर, ईदगाह ड्योढ़ी और सिंधी विस्थापितों की समस्याओं के निराकरण के लिए बैठक ली थी। इसमें उन्होंने एक कमेटी का गठन करते हुए, संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव और कलेक्टर तरुण पिथोड़े से इन मामलों को सुलझाने के लिए जानकारी मांगी थी। गौरतलब है कि यदि यह मामला सुलझा तो 600 एकड़ में बसी कॉलोनियों के रहवासियों को अपने मकानों को नामांतरण व उनके निर्माण की अनुमतियां मिलने में आसानी होगी, वर्तमान में इस पर रोक लगी है।

यह है ईदगाह ड्योढ़ी का इतिहास : ईदगाह ड्योढ़ी 600.83 एकड़ जमीन 1923 तक के बंदोबस्त रिकॉर्ड और 1959 के रेवेन्यू रिकॉर्ड में सरकारी रूप में दर्ज है। लेकिन 17 नवंबर 1917 के एक इनायतनामा में नवाब सुल्तान जहां बेगम द्वारा अपने बड़े बेटे नवाब नसरुल्ला खान को उपहार में देने का जिक्र है। कलेक्टर भोपाल के कार्यालय में 26 मार्च 1974 का तत्कालीन कमिश्नर का एक पत्र है, जिसमें ईदगाह ड्योढ़ी की जमीन नवाब नसरुल्ला खान की मिल्कियत होने की बात कही गई है।

रहवासियों से मांगे जा सकते हैं 59 साल पुराने दस्तावेज

सर्वे के आधार पर टीम ईदगाह ड्योढ़ी की जमीन पर बनी कॉलोनियों के रहवासियों की सूची बनाएगी। दस्तावेजों की जानकारी दर्ज की जाएगी। हालांकि, ईदगाह ड्योढ़ी में काबिज लोगों से 2 अक्टूबर 1959 से वर्ष 2000 तक के दस्तावेज पेश करने होंगे, क्योंकि इसको तत्कालीन कलेक्टर अनुराज जैन ने 2001 में सरकारी घोषित कर दिया था। मर्जर प्रभावित जमीन पर रह रहे जो परिवार पात्र पाए जाएंगे, उन्हें पट्टे बांटे जाएंगे, लेकिन ये पट्टे सिर्फ 30 वर्ष या उससे अधिक की लीज के हो सकते हैं। जो मर्जर प्रभावित परिवार वर्ष 1959 से अब तक शहर में रह रहे हैं, उनकी लिंक रजिस्ट्रियों की जानकरी भी ली जाएगी। पहले चरण में ईदगाह ड्योढ़ी तो द्वितीय चरण में मर्जर प्रभावित अन्य 18 गांवों के दस्तावेज खंगाले जाएंगे।