IAD की आठ बड़ी योजनाएं धराशायी

IAD की आठ बड़ी योजनाएं धराशायी

इंदौर । दो साल पहले आईडीए ने कुछ ऐसी योजनाएं लागू की थीं, जो शहर हित में थीं, लेकिन कुछ नए प्रावधानों के कारण इन योजनाओं को धरातल पर लाना आईडीए के लिए मुश्किल हो गया। इसमें केंद्र सरकार के भू-अधिग्रहण कानून, जमीन के बदले किसानों को भारी- भरकम मुआवजा और रियल एस्टेट रेगुलेशन अथॉरिटी (रेरा) का लागू होना आईडीए के लिए मुश्किल बन गए। इन बड़ी बाधाओं के चलते आईडीए के आठ बड़े प्रोजेक्ट धराशायी हो गए। जो प्रोजेक्ट धराशायी हुए हैं, उनमें ये चार बड़े निवेशकों को बढ़ावा देने के लिए हैदराबाद की तर्ज पर फिनटेक सिटी, ट्रांसपोर्ट हब, एयरपोर्ट से पीथमपुर तक फोरलेन तथा टिगरिया बादशाह में रीजनल पार्क भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार ये सारे प्रोजेक्ट तीन साल पुराने हैं, जो आज तक धरातल पर नहीं आ पाए। आईडीए को शासन के नए-नए नियमों से जूझना पड़ा, वहीं उसकी माली हालत भी काफी कमजोर रही। यही कारण है कि कई बड़ी योजनाओं का बट्ठा बैठ गया। हालांकि आईडीए के अफसरों ने इन प्रोजेक्टों पर कई बार मंथन किया, लेकिन कानूनी अड़चनों के आगे उसे झुकना पड़ा। बताया गया है कि केंद्र सरकार के भू- अधिग्रहण कानून ने भी आईडीए के सामने संकट खड़ा कर दिया था। भारी मुआवजे के प्रावधान के चलते कई बड़े प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते के हवाले हो गए। बताया गया है कि ये प्रोजेक्ट पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं, लेकिन भविष्य में इन प्रोजेक्टों को धरातल पर लाने की पूरी योजना है।

इन योजनाओं पर लगा ग्रहण

शिवाजी सर्कल अंडर पास- आईडीए ने शिवाजी प्रतिमा सर्कल पर अंडर पास की भी योजना गत वर्ष तैयार की थी। केंद्र सरकार के विभाग और मेडिकल कॉलेज की जमीन इस योजना के आड़े आ रही है, जिसके चलते अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है।

सुपर कॉरिडोर पर स्मार्ट हाईराइज- आईडीए ने सुपर कॉरिडोर की योजना क्र. 159 पर स्मार्ट हाईराइज की योजना तैयार की थी। कागजों पर तैयार इस योजना को सुपर कॉरिडोर पर लाने के पीछे मंशा वहां बड़ी कंपनियों का आना था। यह स्मार्ट हाईराइज योजना पहले रेरा के फेर में उलझ गई, जिसके चलते काम आगे नहीं बढ़ सका।

पश्चिमी रिंग रोड- धार रोड स्थित चंदन नगर से मोहता बाग एरोड्रम रोड तक फोरलेन सड़क का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। ढाई किमी की इस सड़क की लागत करीब 35 करोड़ रुपए है। यहां पर लगभग 300 से भी ज्यादा मकान- दुकान हैं, जो सड़क की जद में आ रहे हैं। इन्हें 400 करोड़ का मुआवजा देना होगा। इस योजना में मुआवजा राशि के लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा था, लेकिन इतनी मोटी राशि देखकर शासन ने भी अपने हाथ खींच लिए।

एयरपोर्ट कॉरिडोर- ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान मुख्यमंत्री ने एयरपोर्ट रोड से सीधे पीथमपुर तक फोरलेन सड़क बनाए जाने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद आईडीए ने सर्वे करवाया। योजना के तहत 19 किमी के इस कॉरिडोर में 15 गांवों की जमीनें आ रही हैं। आईडीए ने योजना तो तैयार कर ली पर मुआवजे के कारण सारा मामला अटक गया।

विजयनगर कमर्शियल मार्केट रोडवेज बंद होने के बाद विजयनगर स्थित डिपो की जमीन सुप्रीम कोर्ट से आईडीए को मिली। चार साल पहले यहां पर कमर्शियल मार्केट बनाने का प्लान तैयार किया। जमीन बस स्टैंड के लिए आरक्षित है। सरकार ने निर्देश दिए कि 65 प्रतिशत जमीन का उपयोग बस स्टैंड और 35 प्रतिशत जमीन कमर्शियल उपयोग में ली जाए, लेकिन आईडीए पूरी जमीन का कमर्शियल उपयोग करना चाहता है, जबकि सरकार मना कर चुकी है। ऐसे में योजना आईडीए के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है।

फिनटेक सिटी- सेंट्रल इंडिया की पहली फिनटेक सिटी प्रोजेक्ट पर कोई प्रगति नहीं हुई। सुपर कॉरिडोर पर प्रस्तावित इस योजना के लिए आईडीए 50 एकड़ जमीन आरक्षित कर चुका था। इस प्रोजेक्ट के लिए तीन-चार कंपनियों ने रुचि दिखाई थी, मगर इससे आगे कुछ नहीं हुआ।

ट्रांसपोर्ट हब- योजना क्र. 174 में आईडीए ने ट्रांसपोर्ट हब बनाने की योजना बनाई थी। इस प्रोजेक्ट को लेकर सरकार ने कोई रुचि नहीं ली। हालांकि आईडीए ने पूरा प्लान तैयार कर सलाहकार नियुक्त भी कर लिया था। बावजूद इसके इस योजना में कोई प्रगति नहीं हुई। नए मुआवजा प्रावधान के बाद प्रोजेक्ट की राशि काफी बढ़ गई जो आईडीए के बूते में नहीं रही।

टिगरिया बादशाह रीजनल पार्क- सुपर कॉरिडोर पर टीसीएस के पास ही टिगरिया बादशाह में आईडीए ने 40 एकड़ जमीन पर तालाब गहरीकरण के साथ रीजनल पार्क के समान 50 करोड़ रुपए की लागत से एक नया पार्क बनाने की योजना बनाई थी। सरकार ने प्लान को स्वीकृत भी कर दिया, मगर योजना पूरी नहीं हो सकी।