घालमेल नहीं होता तो बड़ी दुकान बनाने 4-4 गुमटियां एक कैसे हो जातीं कटंगा में

घालमेल नहीं होता तो बड़ी दुकान बनाने 4-4 गुमटियां एक कैसे हो जातीं कटंगा में

जबलपुर ।   एक तो नगर निगम की जगह पर केंट बोर्ड ने गुमटियां बनाकर आवंटित कर दीं, उसके बाद खरीदने वालों ने भी 4- 4 गुमटियों को मिलाकर आलीशान दुकान तैयार कर ली। चार की एक गुमटी बनाने वालों का तर्क भी अजीब है। हालांकि मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद सभी 45 गुमटियों का आवंटन निरस्त कर दिया गया है और निश्चित तौर पर प्रभावित परिवारों पर रोजगार का संकट सामने खड़ा होगा। गौरतलब है कि गरीब वर्ग के लोगों को व्यापार के लिए छोटे से लेकर बड़े शहरों तक गुमटियों का चलन है। बड़े-बड़े व्यापारिक कॉम्पलेक्सों में पगड़ी न दे पाने वाले लोगों को ये गुमटियां मिलती हैं और वे अपनी दुकानें चलाते हैं। कुछ ऐसे ही मक्सद के साथ केंट बोर्ड ने भी कटंगा में गुमटियां तैयार की। कीमत तो मात्र एक लाख रुपए प्रति गुमटी रखी गई लेकिन घालमेल ऐसा चला कि वहां बड़े-बड़े रेस्टॉरेंट तन गए। जाहिर है कि मक्सद बदल गया और उसका स्वरूप सामने है।

विवाद जमीन का पर संपत्ति बोर्ड की

इस संबंध में केंट बोर्ड सीईओ राहुल आनंद शर्मा का कहना है कि विवाद भले ही जमीन का हो,पर गुमटियां तो केंट बोर्ड की संपत्ति हैं। इसकी सुनवाई केंट बोर्ड नियमों के तहत हम ही करेंगे। यही कारण है कि नोटिस जारी किया गया है। इस संबंध में डीईओ की कोई भूमिका नहीं होती इसलिए सुनवाई भी वहां नहीं हो सकती।

कोर्ट में सुनवाई मंगलवार को

इस मामले में मंगलवार को कोर्ट में सुनवाई होनी है और वहां जो भी आदेश होगा,दोनों पक्षों को मानना होगा।

न्यायालय में रखेंगे अपनी बात

केंट बोर्ड ने इन सभी गुमटी संचालकों के आवंटन निरस्त कर दिए हैं,इसके अनुसार जल्द ही इन गुमटियों को आवंटियों को खाली करना पड़ सकता है। पूछे जाने पर उनकी प्रतिक्रिया रही कि हम न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।