जॉब दिलाने के नाम पर युवकों से लाखों की ठगी, दो धराए

जॉब दिलाने के नाम पर युवकों से लाखों की ठगी, दो धराए

इंदौर  ।  सरकारी विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले दो युवकों को पुलिस ने धरदबोचा। आरोपी लाखों की ठगी कर चुके हैं। उनके पास से बैंक के खाते व फर्जी ज्वॉइनिंग लेटर भी मिले हैं। क्राइम ब्रांच के एएसपी अमरेन्द्र सिंह को फरियादी राहुल सिंह निवासी 106, दुर्गा कॉलोनी मरीमाता ने बताया कि कुछ दिन पहले दो युवकों ने उन्हें फूड कॉर्पोरेशन लिमिटेड में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपए लिए। आवेदक ने बार-बार कंपनी का ज्वॉइनिंग लेटर मांगा तो आरोपीगण गुमराह करते रहे। यहां तक कि उनके द्वारा बैंक में जमा कराई गई डेढ़ लाख रुपए की राशि भी नहीं लौटाई। परेशान होकर आवेदक ने पुलिस को शिकायत की। मामले में जांच करने के बाद पुलिस ने मनोज कुमार पिता दामोदर बनवाड़ीकर (43) निवासी 359, पार्श्वनाथ सिटी उज्जैन एवं सुमित पिता रमेशचन्द्र खरे (46) निवासी राजवल सिटी ए-6/102 अमखेरा रोड आधारतल जबलपुर को गिरμतार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि दोनों की दोस्ती बनारस में हुई थी। दोनों ने एक-दूसरे को बताया था कि वे प्राइवेट जॉब कंसल्टेंसी का काम करते हैं। तबसे दोनों एक-दूसरे के संपर्क में हंै। सुमित के पास जब भी जॉब संबंधित कोई वेकेंसी होती थी तो वह मनोज को भेजता था। मनोज ने आवेदक राहुल एवं चित्रांश को सुमित का मोबाइल नंबर देकर आपस में बातचीत करवाई। आवेदक एवं चित्रांश ने आरोपियों के बैंक खातों में अलग-अलग डेढ़ लाख रुपए जमा करा दिए। लेटर की फोटोकॉपी दिखाई उक्त राशि में से आरोपी कमीशन निकाल लेते थे। आरोपी सुमित ने राहुल व चित्रांश को फूड कॉर्पोरेशन आॅफ इंडिया का ज्वॉइनिंग लेटर का सेम्पल दिखाया और कहा कि तुम्हारे लिए भी ऐसा लेटर जारी होकर आएगा। आरोपियों ने अपने अन्य साथी उमेश के माध्यम से आवेदक के लिए ज्वॉइनिंग लेटर जारी कराने को कहा। जब आवेदक द्वारा ज्वॉइनिंग लेटर की मांग की गई तो उमेश ने और रुपए की मांग की। आवेदक एवं चित्रांश ने कहा कि पहले ज्वॉइनिंग लेटर दो, उसके बाद ही पैसा देंगे।

बड़े गिरोह का करते हैं संचालन

आरोपी मनोज और सुमित अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर ठगी करने वाले बड़े गिरोह का संचालन करते थे। गिरोह के सदस्य प्राइवेट तथा सरकारी नौकरी दिलाने के प्रलोभन देकर हजारों रुपए बैंक खातों में जमा करा लेते थे। ये गिरोह इंदौर, उज्जैन एवं जबलपुर में बेरोजगारों को शिकार बना चुके हैं।