पूंजीपतियों को लाभ दिलाने व डिफेंस की 60 हजार एकड़ भूमि ठिकाने लगाने किया जा रहा निगमीकरण

पूंजीपतियों को लाभ दिलाने व डिफेंस की 60 हजार एकड़ भूमि ठिकाने लगाने किया जा रहा निगमीकरण

जबलपुर। केन्द्र सरकार पूंजीपतियों को लाभ दिलाना चाहती है। डिफेंस की करीब 60 हजार एकड़ भूमि पर उसकी नजर है। निगमीकरण इसके लिए सबसे बेहतर रास्ता केन्द्र सरकार को लगा है। उक्त आरोप आयुध निर्माणी बचाओ संघर्ष समिति के एस एन पाठक, अरुण दुबे, नरेन्द्र तिवारी, तथा सरोज विश्वाल ने संयुक्त रूप से पत्रकारों से चर्चा के दौरान लगाए। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि केन्द्र की सत्तारूढ़ सरकार के साथ विपक्ष भी खामोश बैठा हुआ है। एक माह की हड़ताल 20 अगस्त से शुरु होगी।

पुराने व नए सभी कर्मचारियों का भविष्य होगा खराब

निगमीकरण की शुरुआत केन्द्र सरकार ने कर तो दी लेकिन इसके हश्र से सबक नहीं लिया। निगमीकरण के कारण नए व पुराने कर्मचारी सभी का भविष्य खराब होता चला आ रहा है। कई संस्थान तो बंद तक हो चुके हैं।

ये हैं महत्वपूर्ण बिंदु

* देश में सेना की रक्षा जरुरतों को पूरा करने में 41 सुरक्षा कारखानों का विगत 218 वर्षों से अहम योगदान रहा है।

* इन कारखानों को निगम बनाने से कालांतर में बीएसएनएल की तरह बर्बादी की संभावनाएं प्रबल हो रही हैं।

* कर्मचारियों के साथ ही देश की लिए भी अपूर्णनीय क्षति होगी।

* सुरक्षा संस्थानों में आकस्मिक जरूरत से कई गुना ज्यादा उत्पादन बढ़ाने की क्षमता रिजर्व रहती है। किसी अन्य स्त्रोत्र से सेना की मांग विषम परिस्थिति में पूरी होना असंभव है।

* सुरक्षा संस्थान घाटे की ईकाइयां नहीं है, ये प्रतिवर्ष सरप्लस जनरेट करती हैं।

* शहर के चार सुरक्षा कारखानों से जबलपुर की पहचान रही है। निगमीकरण व निजीकरण के बाद सामाजिक तथा आर्थिक व्यवस्था भी प्रभावित होगी।