खाद-बीज देने के बजाय भगा देते हैं किसानों को

खाद-बीज देने के बजाय भगा देते हैं किसानों को

भोपाल। खाद-बीज के लिए सोसायटियों से छोटे ऋण लेने के लिए पहुंचने वाले किसानों को यह कहकर भगा दिया जाता है कि, पहले पुराना कर्जा मय ब्याज के चुकाओ तब ही खाद-बीज के लिए नया कर्ज मिलेगा। दरअसल किसानों ने कर्ज माफी की उम्मीद में सहकारी बैंकों से लेकर सहकारी समितियों से लिया गया खाद-बीज का कर्ज नही चुकाया। अब बारिश थमते ही फसलों में यूरिया और डीएपी के साथ बीज की जरुरत होने से किसान जब सोसायटियों तक पहुंच रहे हैं तो उनको पिछला कर्जा मय ब्याज के चुकाने के बाद ही नया लोन मिलने की शर्त रखी जा रही है। यह कर्जा भी 5 हजार रुपए से लेकर 60-70 हजार रुपए तक का ही है। बावजूद ऋण माफी का सर्टिफिकेट दिखाने के बाद भी किसानों को सोसायटियों से भगा दिया जाता है। साथ ही सोसायटियों से किसानों को मय ब्याज कर्ज अदायगी के नोटिस चेतावनी के साथ मिलने लगे हैं। इससे किसानो के सामने अपनी जमीनों के नीलाम होने का खतरा मंडाराने लगा है।

स्वत: मुआवजा सूची से बाहर हो जाएंगे किसान

कर्ज माफी के दायरे में 53 लाख किसानों को लाने के बाद दावा है कि 20 लाख किसानों का कर्जा माफ हो गया है। इन्ही कर्जमाफी वाले 20 लाख किसानों में से अधिकतर ने अपने लोन की अदायगी नहीं की है। ऐसे में उनकी फसल बीमा का प्रीमियम का कटौत्रा होकर जमा नही हो सका। नतीजे में खरीफ फसल के लिए नया लोन नहीं मिला था। यानि उनका बीमा के लिए प्रीमियम कटौत्रा नहीं हो सका। इससे अतिवर्षा से प्रभावित फसलों का जब मुआवजा बंटेगा, तब यह किसान सूची से स्वत: ही बाहर हो जाएंगे।