डी-कोडिंग : क्या मोदी के लिए रोककर रखी गयी है भोपाल सीट ?

डी-कोडिंग : क्या मोदी के लिए रोककर रखी गयी है भोपाल सीट ?

भाजपा का गढ़ कहे जाने वाली भोपाल की हाईप्रोफाइल सीट पर उम्मीदवारों के नाम को लेकर बार-बार समीकरण बदल रहे हैं।  पिछले कुछ दिनों में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर उमा भारती, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा, मौजूदा सांसद अलोक संजर, प्रतिभा आडवाणी और यहाँ तक की साध्वी प्रज्ञा का भी नाम चर्चाओं में रहा है । हालांकि बीते कुछ समय में दो बड़े नाम ही उभर कर आये हैं जो हैं शिवराज सिंह चौहान और उमा भारती के ।

दिलचस्प बात यह है की दोनों ही दिग्गज नेता खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं एवं चुनाव लड़ने से मना करते हुए कह रहे हैं की वे ये निर्णय पार्टी पर छोड़ते हैं और अगर पार्टी बोलेगी तो वे चुनाव लड़ भी सकते हैं । ये बयान इस बात की ओर इशारा करते है की भाजपा नेतृत्व ने भोपाल सीट के लिए कुछ योजना पहले से बना रखी है । यह साफ़ है की पार्टी दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गज नेता के खिलाफ कोई बड़ा नेता ही उतारेगी क्यूंकि भोपाल सीट अब पार्टी के लिए साख का सवाल है । पिछले 30 सालों में पार्टी भोपाल संसदीय सीट से कभी नहीं हारी ।

शिवराज सिंह चौहान के हालिया बयान - 'पार्टी एक से दो दिन में उम्मीदवार की घोषणा करेगी' से यह स्पष्ट होता है की पार्टी ने उम्मीदवार के बारे में फैसला कर लिया है । अब मुद्दा यह है की भाजपा का वो कौन सा बड़ा नेता होगा ?

हाल ही में एक बड़े अंग्रेजी अख़बार की सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट में बताया गया की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्यप्रदेश की किसी सीट से भी चुनाव लड़ सकते हैं । इस पर राजनितिक गलियारों में चर्चा ये चली की वे इंदौर या विदिशा सीट से लड़ सकते हैं । सूत्रों के अनुसार इंदौर सीट में पहले से 'ताई' सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय गुट में खींचतान जारी है । चर्चा है की ताई नहीं चाहती कैलाश विजयवर्गीय को इंदौर से टिकट मिले । इस खींचतान में मोदी जी का इंदौर से लड़ना तार्किक नहीं लगता । विदिशा सीट बेशक भाजपा का गढ़ रही है और विदेशमंत्री सुषमा स्वराज से लेकर अटल बिहारी वाजपई तक यहाँ से चुनाव लड़े और जीतें हैं । कित्नु एक बात गौर करने वाली है की जब से कांग्रेस द्वारा प्रियंका गांधी को वाराणसी से उतारने की अटकलों को बल मिला है मोदी के लिए दूसरी किसी 'सेफ' सीट से लड़ना उनकी कमजोरी मानी जायेगी क्यूंकि यह बात साफ़ है की विदिशा से ज्यादा 'सेफ' सीट पार्टी के पास नहीं है । 

मोदी अपनी आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं, और तो और उन्होंने राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने पर भी चुटकी ली थी की राहुल ने मैग्नीफाइंग ग्लास से वायनाड की सेफ सीट चुनी क्यूंकि वाहन अल्पसंख्यक सबसे ज्यादा हैं । इससे ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है विदिशा से भी वे चुनाव में उतरना नहीं पसंद करेंगे ।

अब सूई अटकती है भोपाल सीट पर । यहाँ से कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह चुनाव मैदान में खड़े हैं । मोदी और दिग्विजय उस ज़माने से एक दुसरे के चिर-प्रतिद्वंदी रहे हैं, जबसे वे अपने-अपने प्रदेशों में मुख्यमंत्री थे । कुछ साल पहले मीडिया के सामने भी दोनों की राजनितिक प्रतिद्वंदिता साफ़ देखी गयी है जब एक इंटरव्यू के दौरान दिग्विजय सिंह ने मोदी पर गुजरात दंगो का आरोप लगाया था । इस पर मोदी ने उल्टा दिग्विजय सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा था की उन्होंने मप्र सरकार से अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की थी लेकिन दिग्विजय सरकार की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला ।

अब यह देखना दिलचस्प होगा की अगर इस बड़े अंग्रेजी अख़बार की खबर सही है तो क्या भोपाल से ही लड़ेंगे नरेंद्र मोदी ?