जालान समिति रिजर्व बैंक के आरक्षित पूंजी स्तर पर जून के अंत तक दे सकती है रपट

जालान समिति रिजर्व बैंक के आरक्षित पूंजी स्तर पर जून के अंत तक दे सकती है रपट

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की आरक्षित पूंजी की समीक्षा के लिए बनायी गयी विमल जालान समिति इस माह के अंत तक अपनी रपट दे सकती है। एक अधिकारी ने बताया कि रपट को अंतिम रूप देने से पहले समिति को एक बैठक और करनी है। सरकार ने रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर जालान की अध्यक्षता में 26 दिसंबर 2018 को छह सदस्यीय समिति का गठन किया था। वित्त मंत्रालय ने रिजर्व बैंक से सर्वश्रेष्ठ वैश्विक नीतियों का पालन करते हुए अधिक अधिशेष सरकार को हस्तांतरित करने के लिए कहा था। बाद में सरकार ने रिजर्व बैंक के आर्थिक पूंजी ढांचे की समीक्षा के लिए इस समिति का गठन कर दिया। रिजर्व बैंक के पास 9.6 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक का पूंजी अधिशेष है। एक अधिकारी ने बैठक के बाद कहा कि जालान समिति एक और बैठक करेगी और इसके बाद अपनी रपट इस माह के अंत तक सौंप देगी। हालांकि समिति को अपनी रपट तीन माह में सौंपनी थी। देरी की वजह पूछने पर अधिकारी ने कहा कि समिति के सदस्यों के बीच राय में मतभेद था, लेकिन इस पर बातचीत कर ली गयी है। समिति में रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर राकेश मोहन, वित्त सचिव सुभाष चं्रद गर्ग, रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एन.एस. विश्वनाथन और रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल के दो सदस्य भारत दोषी और सुधीर मनकड़ शामिल हैं।