खादी कारोबार में वर्ष 2014-15 के बाद से 145 प्रतिशत की बढ़ोतरी

खादी कारोबार में वर्ष 2014-15 के बाद से 145 प्रतिशत की बढ़ोतरी

नई दिल्ली। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने शनिवार को कहा कि वर्ष 2018-19 में खादी उत्पादों की बिक्री के साथ इसका कारोबार 74,323 करोड़ रुपए के स्तर को पार कर गया है। इसका कारण खादी उत्पादों की बिक्री का बढ़ना है, जो वर्ष 2014-15 के बाद से 145 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ा है। केवीआईसी द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, खादी का उत्पादन वर्ष 2014-15 में 879.98 करोड़ रुपए का हुआ था, जो वर्ष 2018-19 में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ 1,902 करोड़ रुपए का हो गया। इसकी बिक्री वर्ष 2014- 15 के 1,310.9 करोड़ रुपए से 145 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ वर्ष 2018-19 में 3,215.13 करोड़ रुपए की हो गयी। केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने कहा, ‘‘यहां तक कि यह ग्रामीण उद्योग वर्ष 2014-15 में हुए 31,965.52 करोड़ रुपए के कारोबार के मुकाबले 123 प्रतिशत की विकास दर के साथ वर्ष 2018-19 में 71,123.68 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले पांच वर्षों में खादी ने खादी कपड़े के उत्पादन में 62 प्रतिशत की औसत छलांग लगाई है, यानी यह वर्ष 2014-15 में 10 करोड़ 32.2 लाख वर्ग मीटर से बढ़कर वर्ष 2018-19 में 17 करोड़ आठ लाख वर्ग मीटर हो गया है। वित्तवर्ष 2014-15 में कुल कपड़ा उत्पादन में खादी की हिस्सेदारी 4.23 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2018-19 में 8.49 प्रतिशत हो गई है, जो लगभग दोगुनी वृद्धि को दर्शाता है। सक्सेना ने कहा, पिछले साढेÞ तीन साल में, केवीआईसी ने 32,000 से अधिक नए मॉडल के चरखे (चरखा) और 5,600 आधुनिक करघे उपलब्ध कराए थे, जिससे खादी का उत्पादन बढ़ा। उन्होंने कहा, ‘‘इस अवधि के दौरान, 40,000 से अधिक नए खादी कारीगरों के साथ 376 नए खादी संस्थानों की संख्या बढ़ाÞयी गई है।

लेह, लद्दाख में भी रोजगार का सृजन किया

केवीआईसी ने खादी के माध्यम से देश के सबसे दूरस्थ भागों जैसे लेह, लद्दाख, काजीरंगा वन, पश्चिम बंगाल में सुंदरवन जैसे इलाकों में भी रोजगार का सृजन किया है।सक्सेना ने इस बयान में कहा है, ‘‘हम, पहली बार, खादी के विपणन के लिए खादी क्षेत्र में रेमंड्स, अरंिवद मिल्स और आदित्य बिड़ला टेक्सटाइल्स जैसी प्रमुख कपड़ा कंपनियों को लेकर आए, जिससे खादी की बिक्री में कई गुना वृद्धि हुई। केवीआईसी ने कर्मचारियों के लिए खादी उपहार कूपन खरीदने के लिए प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों को खादी के दायरे में लिया जिससे 100 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार प्राप्त किया गया।