मंच पर सजीव हो उठी कृष्ण की लीलाएं

मंच पर सजीव हो उठी कृष्ण की लीलाएं

भोपाल। भारत भवन के अंतरंग सभागार में सोमवार की शाम बादल राग के अंतर्गत नृत्य की विभिन्न विधाओं की प्रस्तुतियां हुई। इसमें रिया झा और मधुरा चट्टोपाध्याय ने भरतनाट्यम नृत्य पेश किया। वहीं देवश्री भट्टाचार्य और सोहनी देवनाथ ने कथक नृत्य के आंगिक पक्ष का खूबसूरती से वर्णन किया। प्रस्तुति की शुरूआत भरतनाट्यम नृत्यांगना डॉ. लता सिंह मुंशी की शिष्याओं रिया झा और मधुरा चट्टोपाध्याय ने गणेश वंदना से की। इस क्रम में पद्म में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। इसमें उन्होंने अपनी माता यशोदा के साथ लीलाएं की थी। इस प्रस्तुति के बोल ‘कृष्णानी बैगनो बारो...’ थे। इसमें बताया गया कि कैसे भगवान को मिट्टी खाता देखकर मां यशोदा उनका मुंह खुलवाती हैं और सारा ब्रह्मांड देख लेती है। अगली प्रस्तुति मधुरा चट्टोपाध्याय ने सहदेव रचित अष्टपदी की दी। इस क्रम में नट भैरवी की प्रस्तुति में रिया और मधुरा ने नृत्याभिनय किया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति का समापन मंगलाचरण के साथ किया। कृष्ण पक्ष में राधा रानी का विरह भाव समारोह में कथक नृत्य प्रस्तुति की शुरूआत रवींद्र नाथ टैगोर के प्रकृति प्रेम में रचे-बसे गीत हृदय मंदिरों... से हुई। देवश्री व सोहनी ने इस प्रस्तुति में मेघ गर्जन, बारिश की स्थितियों का वर्णन करते हुए बताया कि इस मौसम में मन कैसा प्रफुल्लित होता है। अगली प्रस्तुति गीत ‘सावन गगन...’ में सोहनी ने कृष्ण पक्ष अभिसारिका के राधा विरह भाव को दिखाया गया। प्रस्तुतियों के क्रम में देवश्री ने ठुमरी में प्रेमिका की विहर वेदना के साथ ही मिलन की खुशी को पेश किया। अगली प्रस्तुति आगरा घराने की बंदिश उमंड घन घुमंड बरसे बूंदरी....की रही। इसमें समूह नृत्य पेश किया गया। साबिर खान द्वारा कंपोज संगीत में सितार, सरोद के साथ कथक नृत्य की जुगलबंदी प्रस्तुत की गई। अंतिम प्रस्तुति में समूह नृत्य के जरिए कथक नृत्य के अभिनय अंग को प्रस्तुत किया गया।