जिस घर में सुंदर मांडना बना हो, उस घर में लक्ष्मी का निवास

जिस घर में सुंदर मांडना बना हो, उस घर में लक्ष्मी का निवास

भोपाल। संग्रहालय के शैक्षणिक कार्यक्रम 'करो और सीखों' के अंर्तगत बुधवार को राजस्थान की मीना जनजाति की पारंपरिक मांडना चित्रकला पर वर्कशॉप का शुभारंभ हुआ। इस 8 दिवसीय शैक्षणिक कार्यशाला का विधिवत उद्घाटन संग्रहालय के निदेशक, प्रो. सरित कुमार चैधुरी, आईटीएस (संयुक्त निदेशक, मानव संग्रहालय) दिलीप सिंह उपस्थित प्रतिभागियों एवं संग्रहालय के वरिष्ठ मानव वैज्ञानिकों द्वारा द्वीप प्रज्जवलन किया गया। यहां प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दे रहे राजस्थान के प्रख्यात मांडने चित्रकार, रामदेव मीणा ने बताया कि राजस्थान की लोकआस्था में मांडनों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यहां के त्यौहारों, उत्सव और मांगलिक कार्यों में मांडने प्रत्येक घर-आंगन की शोभा होते है। इस अवसरों पर घरों की लिपाई, पुताई व रंगाई के साथ मांडने बनाना अनिवार्य समझा जाता है। राजस्थान में ग्रामीण अंचल के अलावा शहरी क्षेत्र में भी मांडना अंकन के जीवंत दर्शन होते है किंतु कुछ घरों में उनके अंकन का माध्यम बदल जाता है। यहां मांडना उकेरने में गेरू एवं खडिया या चूने का प्रयोग किया जाता है। जिसमें गेरू का प्रयोग पार्श्व (बैकग्राउंड) के निर्माण में किया जाता है। जबकि उसमें विभिन्न आकृतियों व रेखाओं का अंकन खड़िया अथवा चूने से किया जाता है। दीपावली पर हर लेडीज अपने घर के द्वार, आंगन व दीवारों की लिपाई-पुताई के बाद भिन्न-भिन्न प्रकार के सुंदर व आकर्षक मांडने उकरेती है। मांडना कला का भारतीय संस्कृति में सदियों से विशिष्ट स्थान रहा है। मांडना कला वर्कशॉप में बड़ी संख्या में स्त्री-पुरुष भाग ले रहे हैं।

मांडना संस्कृति में समृद्धि का प्रतीक

रामदेव मीणा ने आगे बताया कि हमारी संस्कृति में मांडनों को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है और ऐसा माना जाता है कि जिस घर में उनका सुंदर अंकन होता है उस घर में लक्ष्मी जी का निवास रहता है। मांडनों को स्थान आधारित, पर्व आधारित, तिथि आधारित और वर्ष पर्यन्त अंकित किए जाने वाले मांडने के आधार पर मुख्यत: चार प्रकार से बांटे गए हैं। राजस्थान के मांडनों में चौक, चौपड़, संझया, श्रवण कुमार, नागों का जोड़ा, डमरू, फीणी, चंग, मेहंदी, केल, बहू पसारो, बेल, दसेरो, साथिया (स्वस्तिक), पगल्या, शकरपारा, सूरज, केरी, पान, कुंड, बैलगाड़ी, मोर व अन्य पशु पक्षी आदि प्रमुख है।