95 शहरों में एक दिन छोड़ और 21 में दो दिन बाद मिल रहा पानी

95 शहरों में एक दिन छोड़ और 21 में दो दिन बाद मिल रहा पानी

भोपाल। पिछले साल कम हुई बारिश का असर इस बार पीने के पानी पर पड़ रहा है। प्रदेश के 95 शहरों में एक दिन छोड़ और 21 शहरों में दो दिन बाद पीने का पानी लोगों को नसीब हो पा रहा है। इसके अलावा 115 शहरों में टैंकर से परिवहन कर पानी पहुंचाया जा रहा है, वहीं 81 शहरों में पानी की सप्लाई टैंकरों के जरिए की जा रही है। इससे उलट प्रदेश के बांधों में भी सिंचाई के लिए पानी नहीं बचा है। कई बांधों में तो जल स्तर 10 से 15 मीटर तक नीचे चला गया है। यानी यह बांध अब सूखने की कगार पर आ चुके हैं। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो संकट और बढ़ने की संभावना है। पेयजल ही नहीं, बल्कि सिंचाई के लिए भी पानी का संकट बढ़ गया है। खासकर इस वर्ष भीषण गर्मी के चलते हैंडपंपों, बांधें और नलकूपों का जल स्तर 10 से 15 फीट तक नीचे जा चुका है। इससे प्रदेश में स्थापित 21 हजार से ज्यादा हैंडपंप ही नहीं, बल्कि नल-जल योजनाओं में भी पीने का पानी घट गया है, जिसके कारण शहरों में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी पानी को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है। यहां तक पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे के मुलताई स्थित प्रभातपट्टन घर पर टैंकरों से पानी पहुंच रहा है। यहां निजी टैंकरों से सप्लाई मुलताई, इटारसी, पिछोर, इंदौर, बुरहानपुर, पैअलावद, राजगढ़, धार, गौतमपुरा, पार्ढूना, न्यूटनचिखली, वरघाट, बिछिया, शिवपुरी, मुरैना, बायरोड रतलाम, बड़गांव, सिंगौली, बागली, कर्नावद, हाटपिपल्या, सतवासा, जोरा, बोरासा, कनाड, सोनकच्छ, कुकडेश्वर, आलोट, ब्यौहारी, नईगढ़ एवं मैहर का नाम शामिल हैं।

इन शहरों में दो दिन छोड़ पानी

परासिया, झाबुआ, पेटलावद, मेघनगर, राणापुर, राजगढ़, गौतमपुरा, सुसनेर, तराना, अकोदिया, पनखेड़ी, नगरी, सीहोर, कोठारी, इच्छावर, बैतूल, आमला, मलताई, माचलपुर, जावर एवं आष्टा शहर शामिल हैं।

सबसे ज्यादा पेयजल संकट

प्रदेश के छोटे शहरों में सबसे ज्यादा पेयजल संकट इंदौर संभाग के 22 शहर, उज्जैन संभाग के 38 शहर, भोपाल संभाग के 14 शहर और सागर संभाग के 10 शहरों में बढ़ गया है।